मुज़फ़्फ़रनगर की किसान महापंचायत——
आदरणीय मोदी जी,
प्रधानमंत्री, भारत
मान्यवर,

इसी अवाम ने देश से गोरों को भगाया था सभी प्रकार की यातनायें सह कर, जलियावाला गोलीकाण्ड सह कर, अण्डमान निकोबार का काला पानी सहकर, जेल यात्रा व फाँसी के फ़ंदो को चूम कर भी मुल्क को गोरों से आज़ाद कराया। 18 महीने का किसान आंदोलन जिसने सरकार की लाठियाँ सही, सड़कों पर खून बहाया, भूखे प्यासे आसमान के नीचे पड़े रहे, सर्दी, गर्मी,वर्षा सही पर अपनी माँगो के लिए डटे रहे, अपना धैर्य नहीं खोया और यह एक उदाहरण हैं कि इतना लम्बा आंदोलन अहिंसक रहा यह क़ाबिले तारीफ़ हैं, किसान भाइयों के धैर्य व समझ को सलाम हैं।समझ से परे हैं कि जनता की चुनी सरकार जनता से बात करने से क्यों भागती या बात गम्भीरता से क्यों नहीं करती?
मोदी जी जिन तीन किसान कानूनो को आप किसान के जीवन में बदलाव लाने वाला मानते हैं वही क़ानून जब किसान भाइयों की जान लेवा लगता हैं तो फिर सरकार क्यों इन क़ानून,जिन्हें किसान भाई काला क़ानून कहते हैं,
को थोपने को आमादा हैं। कही आपकी सरकार का कोई छुपा अजेंडा तो नहीं यह पूछता हैं भारत क्योंकि इतना लम्बा आंदोलन चले और सरकार चैन की बांसुरी बजाए यह तो किसी भी जनकल्याणकारी सरकार का चरित्र नहीं हो सकता।किसान जो हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं सड़क पर हो तो कैसा लोकतंत्र कैसा राज और कैसी संवेदनशील सरकार? किसान इसी संविधान का मतदाता हैं जिसके तहत आप प्रधानमंत्री हैं फिर ये दोहरे मापदण्ड क्यों कि सरकार तो चलेगी, तिरंगा लगी कार में घूमेंगे, सरकारी सुरक्षा में रहेंगे पर मतदाता की न सुनेंगे न मानेंगे।
मोदी जी अब भी वक्त हैं जागो किसान भाइयों की सुनो या तो उन्हें समझाओ या उनकी मान काला कृषि क़ानून वापस लो।यह तो यदि आपकी सरकार अहंकार में नहीं होती, बहुमत का अहंकार नहीं होता और सरकार के ज़ेहन में किसान हित होता तो आज यह नोबत नहीं आती। संसद में इन कृषि कानूनो पर बहस करते कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलो ने यह क़ानून कमेटी को सौपने की पुरज़ोर माँग की थी पर बहुमत का भूत आपकी सरकार के सर पर सवार था और आप ने विपक्ष की एक नही सुनी और आज आपके इस अहंकार की सजा देश भुगत रहा हैं।आपको याद दिलाना चाहता हूँ जनता की आवाज़ के सामने आपको किसान, गाँव व गरीब विरोधी भूमि सुधार बिल भी वापस लेना पड़ा और किसान एकता के आगे इस कृषि बिल का भी यही हश्र होगा फिर पता नही आपके कौन सलाहकार, कौन सरकारी एजेन्सी सर्वे निश्चिन्त किए हैं कि आप जनता की सुनने मानने को क़तई तैय्यार नहीं।
इससे पहले कि गांधी के देश का चरित्र रक्तरंजित हो, देश में ग्रह युद्ध भड़के और कोई भगतसिंह बहरी सरकार को सुनाने के लिए संसद में धमाका करे आप चेतो किसान से सम्मानजनक समझोत करो और जनता की माँग पर काला कृषि क़ानून वापस ले इस आठ माह लम्बे किसान आंदोलन को समाप्त कर बजाय मुज़फ़्फ़रनगर के किसान को अपने घर अपने खेत भेजो।
मोदी जी कही ऐसा ना हो की उत्तरप्रदेश का यह मुज़फ़्फ़रनगर आपके लिए वाटरलू साबित हो।
अच्छा होता कि आप की सरकार किसान आन्दोलन दबाने या इसमें फूट डालने की कौशिश के बजाय देश के अन्य मुद्दे ग़रीबी,बेरोज़गारी, महंगाई को रोकने में लगाती।
डॉक्टर श्रीगोपाल बाहेती, पूर्व विधायक पुष्कर