बेरोजगारी के मामले में राजस्थान का देश में दूसरा स्थान, सरकार की विफलता का परिचायक

प्रो. वासुदेव देवनानी
अजमेर, 4 जनवरी। पूर्व शिक्षा मंत्री और अजमेर उत्तर के विधायक वासुदेव देवनानी ने आरोप लगाया है कि राजस्थान में कांग्रेस सरकार ने बेरोजगारों को केवल छला है। पिछले तीन साल में सरकार ना तो बेरोजगारों को रोजगार दे पाई और ना ही उन्हें बेरोजगारी भत्ता दिया गया। ऐसे में बेरोजगार अपने आपको ठगा-सा महसूस कर रहे हैं।
देवनानी ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि जो सर्वे सामने आया है, उसमें देशभर में बेरोजगारी के मामले में राजस्थान का दूसरा स्थान है। इससे यह साबित होता है कि प्रदेश में लगातार बेरोजगारी बढ़ रही है और सरकार बेरोजगारों को रोजगार देने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। राजस्थान से तो कहीं ज्यादा बेहतर स्थिति में उत्तरप्रदेश है, जहां बेरोजगारों का ग्राफ काफी नीचे आया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रजिस्टर्ड बेरोजगारों की संख्या 14 लाख है, लेकिन भत्ता केवल दो लाख बेरोजगारों को ही मिल पाया है, जबकि 12 लाख बेरोजगार आज भी भत्ता पाने के लिए तरस रहे हैं।
देवनानी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बेरोजगारों को ठगते रहे हैं और बेरोजगारों को रोजगार देने के मामले में झूठ बोलते रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने अभी तक जितनी भी भर्तियां निकाली हैं, उनकी परीक्षाओं में पेपर लीक होते रहे हैं। ऐसा लगता है कि हर भर्ती परीक्षा में पेपर लीक होना कांग्रेस राज में एक परम्परा बन गई है। पिछले दिनों ग्राम विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा हुई, जिसके भी पेपर लीक मामले में एनएसयूआई के प्रदेश महासचिव की गिरफ्तारी हुई है। इससे यह जाहिर होता है कि इस आरोपी की पहुंच कांग्रेस के आला कमान और बड़े नेताओं तक है।
देवनानी ने कहा कि अभी जो आंकड़े सामने आए हैं, उसके अनुसार प्रदेश में केवल 48 हजार पदों पर भर्तियां होनी हैं, जबकि बेरोजगारों का आंकड़ा 70 लाख से ऊपर है। अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार देकर बेरोजगारी कम करने की सरकार ने कोई नीति नहीं बनाई है। ऐसे में समझ में नहीं आता है कि आखिर प्रदेश में बेरोजगारी कैसे कम होगी और युवाओं को कैसे रोजगार मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी के कारण ही प्रदेश विकास में काफी पिछड़ गया है। ना तो नए उद्योग स्थापित हो पा रहे हैं और ना ही कोरोना महामारी से आई मंदी के कारण बंद हुए उद्योगों को फिर से चालू कराने के लिए सरकार ने अभी तक कोई कारगर प्रयास किए हैं।

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