हेट स्पीच पर बिना किसी अपवाद के कानून के अनुसार सजा का प्रावधान हो

अजमेर। सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के वंशज एवं वंशानुगत सज्जादानशीन दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान ने दरगाह स्थित खानकाह शरीफ में ख्वाजा साहब के 810 वें उर्स के मौके पर कहा कि उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएँ भारत के साथ-साथ विश्व स्तर पर भी देखी जा रही हैं। धर्म राजनीति क्षेत्रवाद नस्लीयता या फिर किसी भी आधार पर होने वाली सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिये ज़रूरी है कि हम सब मिलकर सामूहिक प्रयास करें और अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन ईमानदारी एवं सच्ची निष्ठा के साथ करें। यदि हम ऐसा करने में सफल हो पाते हैं तो निश्चित रूप से न केवल देश में बल्कि विश्व स्तर पर सद्भावना की स्थिति कायम होगी क्योकि सांप्रदायिकता का मुकाबला एकता एवं सद्भाव से ही किया जा सकता है।

हिजाब मुस्लिम महिलाओं का संवैधानिक एवं धार्मिक अधिकार है इस पर किसी भी प्रकार से रोक लगाना महिलाओं के संवैधानिक अधिकार को बाधित करना होगा सभी तरह के नफरत भरे भाषणों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और दंड प्रक्रिया संहिता में संशोधन समेत विधायी कदम उठाने की जरूरत है।

अजमेर दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख एवं दरगाह दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान सोमवार को दरगाह स्थित खानकाह शरीफ में ख्वाजा साहब के 810 वें उर्स के मौके पर देश भर से आए हुए विभिन्न दरगाह के सज्जादानशीनों धर्म प्रमुखों सूफ़ियों की वार्षिक सभा में संबोधित कर रहे थे उन्होंने कहा कि हिजाब पहनना मुस्लिम महिलाओं का धार्मिक एवं संवैधनिक अधिकार है इसमें किसी प्रकार की रोक नहीं लगानी चाहिए क्योंकि सभी धर्मों के छात्रों को अपने अपने धर्मों के प्रतीक इस्तेमाल करने की पूरी स्वतंत्रता है तो कॉलेज परिसर में हिजाब पहनकर आने पर पाबंदी लगाना न सिर्फ संवैधनिक अधिकार को चुनौती देना है बल्कि देश में सांप्रदायिक माहौल तैयार करना है। उदाहरण के तौर पर उन्होंने कहा कि कर्नाटक के उडुपी जिले के कुंडापुर में एक सरकारी कॉलेज में तीसरे दिन एक बार फिर हिजाब पहनी मुस्लिम छात्राओं को प्रवेश करने से रोका गया यह मुस्लिम महिलाओं के संविधान एवं धार्मिक अधिकारों पर कुठाराघात है।

हेट स्पीच पर आध्यात्मिक प्रमुख ने कहा कि भड़काऊ व विभाजनकारी भाषण देने वालों को बिना किसी अपवाद के कानून के अनुसार सजा का प्रावधान हो। नफरत की राजनीति को भ्रष्टाचार के समान करार दिया और सभी राजनीतिक दलों व उनके नेताओं को नफरत फैलाने वह समाज के एक वर्ग को दूसरे वर्ग के खिलाफ खड़ा करने से बचने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी तरह के नफरत भरे भाषणों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और दंड प्रक्रिया संहिता में संशोधन समेत विधायी कदम उठाने की जरूरत है।

हमें यह समझना होगा की दुनिया में विकास और सफलता हथियार और आतंकवाद से नहीं बल्कि कड़ी मेहनत और समर्पण से हासिल होती है। जिस तरह इस्लाम में जानवर पर जुल्म करना भी हराम है और जो मजहब दरिंदों पर जुल्म करने को भी मना करता है वो इंसानियत पर कैसे जुल्म कर सकता है। अतः मुल्क वासियों हमें इस नाजुक दौर में किसी भी हिंसक गतिविधियों से परहेज करना है और दूसरे गुमराहों को भी नेक राह दिखाकर मुल्क की तरक्की में खिदमत करनी है। सभी धर्मों के लोगों को यह समझना चाहिए कि मजहब एक नूर है दहशतगर्दी एक अंधेरा है। जिसमें बेवजह लोगों को फंसा दिया जाता है। इसलिए सभी मजहबी लोगो को अफवाहो की सख्त मजम्मत करते हुए वतन परस्ती की मिशाल कायम करनी चाहिए।

अगर चिलचिलाती धूप में जब आप प्यास से बेहाल हो ऐसे में चंद घूँट पानी मिल जाए या सख्त गर्मी में ठंडी हवा का झोंका आ जाए तो एक ताजगी सी आ जाती हैं । कुछ ऐसी ही ताजगी हम आज के दौर मे दिखानी चाहिए और इस ठंडी हवा के झौंके का काम दरगाह और खानकाओ को करना चाहिए। ओर ये सब कौमी माईचारे से ही मुमकिन है। आज जबकि पूरी दुनिया में नफरत फैलाई जा रही है हमारे मुल्क में भी इसी मसले को लेकर फिरकायवरियत और ●मजहबी नफरत की हवा फैलाई जा रही है। गड़े मुर्दे उखाड़ कर उन के नाम पर हंगामा बरपाया जा रहा है। स्वार्थी मनसूबों की सियासत से इंसानियत को कुचला जा रहा है। झूठ फरेब और मक्कारी के बल पर लोगों में अफवाह फैला कर गुमराह किया जा रहा है। अमन और शांति से रहने वाले लोग मुल्क का सयाह मुस्तकबिल देख कर परेशान हैं। ऐसे में मजहबी एकजुट की मुनाकद करना जिस में शामिल मुख्तालिफ मजहब के लोग अमन शांति और आपसी शाईचारे की बात करे तो यह फिरकावारियत की झुलसती गर्मी में ठंडी हवा का का ही तो है। इसलिए हमें भी अपने देश के युवाओं को अतिवाद वह आतंकवाद की तरफ झुकने से रोकना चाहिए उन्हें कुछ कट्टरवादी विचारधारा वाले संगठनों से जुड़ने से रोकना चाहिए और उन्हें शिक्षा की ओर अग्रसर करना चाहिए। मुल्क की तरक्की आतंकवाद से नहीं बल्कि सही तालीम से ही संभव है।
इस पारंपरिक आयोजन में देष की प्रमुख चिष्तिया दरगाहों के सज्जादगान व धर्म प्रमुखों में शाह हसनी मियां नियाजी बरेली शरीफ, अब्दुल वाहिद कादिर साहब हेदराबाद, अहमद निजामी दिल्ली, सैयद तुराब अली हलकट्टा शरीफ आध्रप्रदेष, सैयद जियाउद्दीन अमेटा शरीफ गुजरात, बादषाह मियां जियाई जयपुर, सैयद बदरूद्दीन दरबारे बारिया ा, सहित भागलपुर बिहार, फुलवारी शरीफ यु.पी., उत्तरांचल प्रदेष से गंगोह शरीफ दरबाह साबिर पाक कलियर के अलीषाह मियां, गुलबर्गा शरीफ में स्थित ख्वाजा बंदा नवाज गेसू दराज की दरगाह के, नायब सज्जादानशीन सैयद यद्दुलाह हसैनी, दरगाह सूफी कमालुद्दीन चिष्ती के सज्जानषीन गुलाम नजमी फारूकी, नागौर शरीफ के पीर अब्दुल बाकी, दिल्ली स्थित दरगाह हजरत निजामुद्दीन के सैयद मोहम्मद निजामी, सहित देशभर के सज्जादगान मौजूद थे।

द्वारा सज्जादनशीन एवं मुस्लिम धर्म प्रमुख दरगाह दीवान सैय्यद जैनुल आबेदीन अली खान अजमेर शरीफ।

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