अजमेर शहर व्यापार महासंघ के अध्यक्ष किशन गुप्ता ने बताया कि स्वायत्त शासन विभाग द्वारा घर-घर कचरा संग्रहण योजना के तहत उपयोग राशि निर्धारण और वसूली का अजमेर शहर व्यापार महासंघ द्वारा विरोध किया जा रहा है। महासंघ ने सरकार के तानाशाही रवैये का विरोध करते हुए कहा कि सरकार का काम लोक हित में कार्य करना होता है जिसके फलस्वरूप जनता के टैक्स के पैसे को उन्हीं के विकास पर खर्च करना होता है | उन्होंने आरोप लगाया कि आज कांग्रेस सरकार और अजमेर का नगर निगम एक व्यापारी के रूप में कार्य कर रहे हैं और जनता से लगातार विभिन्न प्रकार की कर वसूली कर रहे है ।
महासंघ के प्रवक्ता सीए विकास अग्रवाल व कमल गंगवाल ने बताया नगर निगम विभिन्न टैक्स के माध्यम से जनता से लगातार वसूली करती है और उस के एवज में आम जनता की मौलिक आवश्यकताओं की पूर्ति भी नहीं करती है | तत्कालीन भाजपा सरकार जब सत्ता में थी उस समय में भी कचरा संग्रहण राशि का शहर के प्रबुद्ध नागरिकों व महासंघ ने विरोध किया था और इस शुल्क के विरोध में एक हस्ताक्षर अभियान चला कर आम नागरिकों को जागरूक किया था तब भाजपा सरकार को इस काले कानून को वापस लेना पड़ा।
सचिव गिरीश लालवानी के अनुसार अजमेर नगर निगम के निर्वाचित जन-प्रतिनिधि यथा पार्षद, मेयर और डिप्टी मेयर को भी यह सोचना चाहिए कि ये जनतंत्र है और ये सभी अजमेर की जनता के बहुमूल्य वोट से चुन कर निगम पहुंचे हैं तो इन्हें भी जनता की भावना व इच्छा का सम्मान करते हुए कचरा संग्रहण योजना का विरोध करना चाहिए।
अजमेर शहर व्यापार महासंघ के समस्त पदाधिकारी द्वारा ज्ञापन में अपील की कि चूंकि जब जनता अजमेर निगम को विभिन्न टैक्स के माध्यम से राजस्व देते हैं एवं सफाई व्यवस्था की ज़िम्मेदारी स्थानीय नगर निगम की है तो इस के लिए एक और टैक्स देने का भार न्यायहित में अजमेरवासियों पर नहीं थोपा जाए और तुरंत प्रभाव से इसे विलोपित किया जाए।
सीए विकास अग्रवाल,
प्रवक्ता, अजमेर शहर व्यापार महासंघ
मो. 9829535678