-अत्याचार और उत्पीड़न के मामले बेलगाम
-पिछले साढे़ तीन साल के दौरान दर्ज मामले चैंकाने वाले
-सख्त कार्रवाई के अभाव में असामाजिक तत्वों के हौंसले बुलंद

पन्द्रहवीं राजस्थान विधानसभा के सप्तम सत्र में गृह विभाग से पूछे तारांकित प्रश्न पर प्राप्त उत्तर की जानकारी देते हुए देवनानी ने कहा कि प्रदेश में साढ़े तीन साल के दौरान अनु.जाति व अनु.जनजाति पर अत्याचार एवं उत्पीड़न के मामलों में रिकाॅर्ड तोड़ वृद्धि हुई है। पुलिस में दर्ज मामले बेचैनी बढ़ाने वाले हैं। गत भाजपा सरकार के पांच साल के सुशासन में अनु.जाति तथा अनु.जनजाति पर अत्याचार और उत्पीड़न के मामलों में उत्तरोत्तर कमी दर्ज की गई, जबकि कांग्रेस सरकार में गत साढ़े तीन साल में संबंधित मामलों में उत्तरोत्तर वृद्धि देखी गई। वर्ष 2014 से 2018 तक क्रमश 8415, 7320, 6331, 5222 व 5702 मामले दर्ज हुए, जबकि वर्ष 2019 से 2021 तक क्रमश 8591, 8895 तथा 9645 मामले दर्ज हुए। जिस गति से मामले सामने आए है वह निश्चित ही चिंता और चिंतन का विषय है।
देवनानी ने बताया कि अनु.जाति तथा अनु.जनजाति पर अत्याचार और उत्पीड़न के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने हेतु कांग्रेस सरकार की न कोई दिशा और न ऐसी कोई दृष्टि ही है। सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति के अभाव में असामाजिक तत्वों के हौंसले बुलंद है। देवनानी ने प्रदेश में अनु.जाति तथा अनु.जनजाति पर बढ़ते अत्याचार और उत्पीड़न के मामलों पर लगाम लगाने एवं दोषियों पर तत्काल प्रभाव से सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।