-कांग्रेसी नेताओं के बयान पर देवनानी का पलटवार।
-देवनानी की कांग्रेसियों को अपनी गिरेबान में झांकने की नसीहत।
-रैलियों का संबंध नुपूर से नहीं, कन्हैया हत्याकांड व बिगडती कानून व्यवस्था के खिलाफ।

भाजपा नेता, पूर्व शिक्षा मंत्री एवं वर्तमान अजमेर उत्तर विधायक वासुदेव देवनानी ने कांग्रेस नेताओं के बयान पर पलटवार किया है। देवनानी ने कहा अजमेर में विशाल रैली किसी व्यक्तिविशेष की ओर से नहीं बल्कि सकल हिन्दू समाज द्वारा हिन्दू देवी-देवताओं के अपमान करने वालों के खिलाफ आयोजित की गई। हिन्दू समाज का अभिन्न अंग होने के चलते मेरा रैली में शामिल होना दोगले कांग्रेसियों की नजर में गुनाह है तो देवनानी यह गुनाह बार-बार करेगा।
देवनानी ने कहा कि पिछले साढे तीन सालों में प्रदेश में हिन्दू समाज की अनदेखी की जा रही है। कांग्रेस सरकार की शह पर समाज विरोधियों द्वारा योजना से हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान एवं धार्मिक रैलियों में व्यवधान का सिलसिला जारी है। करौली, भीलवाडा, जोधपुर सहित दर्जनों जिलों में समाजकंटकों द्वारा शांतिप्रिय हिन्दू समाज पर पत्थरबाजी और आगजनी की वारदातों को अंजाम दिया गया। इससे सम्पूर्ण हिन्दू समाज में समाज विरोधियों को प्रश्रय देने वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ आक्रोश व्याप्त फूट पडा। अजमेर में आयोजित सकल हिन्दू समाज की रैली भी इसी स्वभाविक आक्रोश का परिणाम थी। कांग्रेस नेताओं ने इस रैली पर सवाल खड़े कर अपनी औछी मानसिकता स्पष्ट कर दी है। अजमेर की रैली उदयपुर की घटना के पहले की है जो स्वप्रेरित हिंदू जागरण की थी। अब जो रैलियों आयोजित की जा रही है उसका संबंध नुपूर से नहीं है बल्कि कन्हैया हत्याकांड व बिगडती कानून व्यवस्था के खिलाफ है।
देवनानी ने कहा कि सकल हिंदू समाज तो तय कर चुका है कि वह अपने देवी देवताओं का अपमान कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे लेकिन अब कांग्रेस को तय करना है कि वह किसके साथ है ? भाजपा नेताओं पर दोगलेपन का आरोप लगाने वाले कांग्रेसी इस प्रश्न का जवाब दें।
अपने पर लगे दोगलेपन के आरोप पर बोलते हुए देवनानी ने कहा कि राज्य में पूरी तरह से बिगडी कानून व्यवस्था से प्रदेशवासियों में आक्रोष व्याप्त है। दोगलेपन का आरोप लगाने से पहले कांग्रेसी अपनी गिरेबान में झांके। संतुष्टीकरण की बजाए तुष्टीकरण करने का कांग्रेस का हमेशा से ही इतिहास रहा है। गलत को गलत कहने का साहस कांग्रेसियों में क्यों नहीं है ? राजस्थान में कानून और शान्ति व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ी हुई है। राज्य के गृह मंत्री होने के नाते मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इसमें फेल साबित हुए हैं।