पिताजी की निशानी

जिनसे रोशन है दुनिया हमारी बात यह है बतानी,
आज भी हमारे पास है वह पिताजी की निशानी।
जब भी कुछ करनें की ठानी लिखें है नई कहानी,
लगता ख़ून ऑंख का पानी हार कभी नही मानी।।

इक सफ़र है जीवन हमारा औकात मिट्टी जितनी,
मिट जाएंगी ये काया इक दिन राख है बन जानी।
कर लेना थोड़ा हरि-सुमिरन ऐसी अलख जगानी,
देश के लिए मिट जाना लिख जाना ऐसी कहानी।।

बिना कहानी व्यर्थ ज़वानी यही बात है समझानी,
ना कर हरकत अब कचकानी बनना वीर सैनानी।
कभी सुनाती दादी-कहानी कभी सुनाती यें नानी,
विजय उसी की होती है जो घबराता ना परेशानी।।

सांचे मन से याद करें तो रक्षा करती मात भवानी,
दुखड़े सारे हर लेती वह संपूर्ण जग की महारानी।
कई-कथाएं और कहानी बुज़ुर्ग सुनाते थें ज़ुबानी,
निरन्तर प्रयास ही मंत्र है अग्रसर बढ़नें का जाॅनी।।

याद करते हम बोस आज़ाद बिस्मिल की कुर्बानी,
स्वर्ण अक्षर में अंकित है आज संघर्ष की कहानी।
आज हर एक भारतवासी है उन वीरों की दीवानी,
देश के लिए शहीद हो गए वह सच्चे है बलिदानी।।

रचनाकार ✍️
गणपत लाल उदय, अजमेर राजस्थान
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