आरपीएससी को तत्काल भंग कर यूपीएससी की तर्ज पर हो पुनर्गठन = देवनानी

देवनानी ने विधानसभा में उठाया युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज का मुद्दा

वासुदेव देवनानी
अजमेर 19जुलाई। पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच की मांग को लेकर मंगलवार को अजमेर में भाजयुमो के आरपीएससी महा घेराव पर पुलिस लाठीचार्ज का मुद्दा बुधवार को सदन में गूंजा। पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री और अजमेर उत्तर विधायक वासुदेव देवनानी ने कहा की शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज कर राज्य सरकार ने अंग्रेजी हुकूमत को भी पीछे छोड़ दिया। सरकार के आदेश पर पुलिस ने ऐसी निर्ममता से लाठियां भांजी की 100 से ज्यादा कार्यकर्ता के चोट आई है। देवनानी ने कहा की सरकार अंग्रेजी हुकूमत की तरह आवाज को दबाने के लिए दमनकारी नीतियों पर उतारू हो गई है जिसका जवाब जल्द प्रदेश की जनता वोट की चोट के साथ देगी। देवनानी ने कहा की पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में पैसे लेकर पास कराने के खेल में प्रदेश के लाखो युवा बेरोजगार के अरमानों पर पानी फेरा है। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और आरपीएससी जैसी संस्थाएं अपनी ईमानदारी और निष्पक्षता के लिए देश भर में जानी जाती थी लेकिन पिछले साढ़े चार साल में गहलोत सरकार ने इसे कलंकित कर दिया है। रीट पेपर लीक मामले में तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष जारोली से पूछताछ तक नही की गई और अब जारोली को गायब ही कर दिया। जबकि जारोली खुद कह चुके थे की वे इस पूरे कांड में महज एक मोहरा है तो क्या असली किरदारों ने खुद को बचाने के लिए जारोली को अंडरग्राउंड कर दिया।
देवनानी ने कहा की राज्य सरकार ने अपने स्वार्थ के चलते संवैधानिक संस्था आरपीएससी में भ्रष्टाचार की जड़े इतनी गहरी कर दी है की अब तत्काल प्रभाव से आरपीएससी को भंग कर यूपीएससी की तर्ज पर उसका पुनर्गठन करने की जरूरत है। देवनानी ने कहा की बाबू लाल कटारा ने स्वीकार किया है की 1.5 करोड़ देकर सदस्य बना हु। वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा में आयोग का एक सदस्य बाबूलाल कटारा पहले ही पेपर लीक कराने की एवज में डेढ़ करोड़ रुपए लेकर जेल में है और हाल ही में ईओ परीक्षा में ओएमआर शीट में नंबर बदलकर पास कराने की एवज में 18 लाख की रिश्वत लेते पकड़ा गया पूर्व राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त गोपाल केसावत ने 25- 25 लाख रुपए आयोग की दो महिला सदस्यों के नाम पर पास करवाने का जिम्मा लिया था। इससे पहले आरएएस परीक्षा में नंबर बढ़ाकर पास कराने की एवज में रिश्वत मामले में आयोग की एक सदस्य के पति का भी नाम सामने आया था। ऐसे में जब अध्यक्ष को छोड़कर आयोग में सदस्य ही कुल 4 और तीन के पद रिक्त चल रहे है तो सरकार इसे भंग कर यूपीएससी की तर्ज पर वापस से गठन करे जिसमे सदस्यों की नियुक्ति के मापदंड तय हो। देवनानी ने कहा की मुख्यमंत्री गहलोत ने आरपीएससी में भ्रष्ट आचरण वाले सदस्य नियुक्त किए है जिससे आयोग की साख को बट्टा लगा है। साथ ही जारोली की नियुक्ति भी गहलोत ने ही की थी।

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