दैदीप्यमान नक्षत्र प्रो. राम जैसवाल का अवसान

अजमेर। शब्द, रेखा और रंग की साधना में जीवन अर्पित करने वाले प्रो. राम जैसवाल आज अनंत की यात्रा पर प्रस्थान कर गए। राजस्थान के साहित्य और कला आकाश का यह दैदीप्यमान नक्षत्र भौतिक रूप से भले ही ओझल हो गया हो, किंतु उसकी उजास आने वाली पीढ़ियों के रचनात्मक पथ को सदैव आलोकित करती रहेगी।

लगभग नब्बे वर्षों तक उन्होंने कहानी और कविता में संवेदना के रंग भरे और चित्रकला में मौन को बोलता बनाया। यदि उन्हें राजस्थान में कला शिक्षा का भीष्म पितामह कहा जाए, तो यह श्रद्धा का अलंकार मात्र नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक सत्य है। दयानंद महाविद्यालय के ड्राइंग एंड पेंटिंग विभाग में उन्होंने दशकों तक न केवल कलाकार गढ़े, बल्कि मनुष्यता, अनुशासन और सौंदर्यबोध की परंपरा भी सौंप दी।

सरलता उनका स्वभाव थी और सहजता उनकी पहचान। बड़े कद के बावजूद वे सदैव विनम्र रहे—शायद इसीलिए इतने अपने थे। उनके शब्दों में गुरु की करुणा थी और उनकी रेखाओं में साधक का मौन।

आज कला-जगत ने एक प्रकाशस्तंभ खो दिया है, पर उनकी सृजन-यात्रा विरासत बनकर हमारे बीच जीवित रहेगी।

अजमेरनामा न्यूज पोर्टल इस महान सर्जक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

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