राजस्थान बजट 2026-27 – आंकड़ों की बाजीगरी में उलझा आम आदमी

महंगाई और बेरोजगारी पर सरकार मौन, दो साल बनाम पांच साल सिर्फ जुमले

आज दिनांक 11 फरवरी, 2026 – जानकारी देते हुए समीर भटनागर अध्यक्ष उत्तर ब्लॉक बी राजीव गाँधी पंचायती राज अजमेर ने बताया की राजस्थान बजट वर्ष 2026-27 को प्रदेश की जनता ने बड़े भरोसे और उम्मीदों के साथ देखा था, लेकिन विधानसभा में पेश किया गया का बजट आम जनता की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरने में विफल रहा है। सरकार ने ₹21.52 लाख करोड़ के भारी-भरकम आंकड़े तो पेश किए, लेकिन जमीन पर आम आदमी, मध्यम वर्ग और संविदा कर्मियों के लिए यह बजट केवल ‘झुनझुना’ साबित हुआ है। यह बजट आंकड़ों और घोषणाओं तक सीमित नजर आता है, जबकि ज़मीन पर ठोस और व्यावहारिक कदमों की कमी साफ दिखाई देती है। प्रदेश में बेरोज़गारी, महंगाई, किसानों की बदहाल स्थिति, युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की कमी और व्यापारियों पर बढ़ते आर्थिक दबाव जैसे गंभीर मुद्दों पर बजट में स्पष्ट और प्रभावी रोडमैप प्रस्तुत नहीं किया गया। युवाओं को रोजगार देने के लिए नई भर्तियों और उद्योगों को बढ़ावा देने की ठोस योजना का अभाव है।

भटनागर ने बताया कि महंगाई पर कोई लगाम नहीं: राजस्थान की जनता को उम्मीद थी कि पेट्रोल और डीजल पर VAT (वैट) घटाकर सरकार राहत देगी, लेकिन वित्त मंत्री ने इस पर चुप्पी साध ली, पड़ोसी राज्यों की तुलना में राजस्थान में ईंधन की ऊंची कीमतें बनी रहेंगी। OPS और संविदा कर्मियों से वादाखिलाफी: बजट में पुरानी पेंशन योजना (OPS) के भविष्य को लेकर भारी अनिश्चितता छोड़ दी गई है साथ ही, वर्षों से नियमित होने का इंतजार कर रहे लाखों संविदा कर्मियों के हाथ एक बार फिर खाली रहे हैं। युवाओं के साथ छलावा: नई भर्ती एजेंसी (RSTA) की घोषणा तो की गई है, लेकिन पूर्व में हुई पेपर लीक की घटनाओं और अटकी हुई भर्तियों को पूरा करने के लिए कोई ठोस समय सीमा (Deadline) निर्धारित नहीं की गई है। किसान वर्ग के लिए केवल औपचारिक घोषणाएं की गई हैं, लेकिन सिंचाई, बिजली दरों में राहत, फसल खरीद की गारंटी और कर्ज़ माफी जैसे मुद्दों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। महंगाई से जूझ रही आम जनता के लिए राहत के उपाय नगण्य हैं। यह बजट विकास की बजाय प्रचार पर अधिक केंद्रित प्रतीत होता है। प्रदेश की जनता को राहत देने और आर्थिक मजबूती प्रदान करने के लिए ठोस, पारदर्शी और जवाबदेह नीति की आवश्यकता है। यह बजट केवल ‘हेडलाइन मैनेजमेंट’ और लोक-लुभावन नारों तक सीमित है। विजन के नाम पर केवल संस्थाओं (जैसे RITI) के नाम बदले जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर गरीब और मध्यम वर्ग की समस्याओं का कोई समाधान नहीं दिया गया है। यह बजट “ऊंची दुकान, फीका पकवान” का जीवंत उदाहरण है।

समीर भटनागर
उत्तर ब ब्लॉक अध्यक्ष राजीव गाँधी पंचायती राज, अजमेर
वार्ड 76 कांग्रेस पार्षद प्रत्याशी अजमेर
7737173717

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