अजमेर, 11 फरवरी, 2026 / अजमेर के निकटवर्ती गाँव बीर पर अनिल कुमार जैन द्वारा लिखी गई पुस्तक “बातें – बीर गांव की” का लोकार्पण बुधवार को दैनिक नवज्योति अजमेर के प्रधान संपादक दीनबंधु चौधरी ने किया। पुस्तक नजर डालते हुए चौधरी जी ने इसे सराहनीय प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण संस्कृति को आज सहजने की जरूरत है और यह इस दिशा में प्रेरणात्मक कदम है।
उन्होंने बातें बीर की गाँव पुस्तक का नाम सुनते ही पिकनिक स्थल को याद किया। उन्होंने कहा कि वास्तव में यहां का तालाब बहुत सुंदर है। यहाँ एक समय पिकनिक वालों का तांता लगा रहता था। उन्होंने इस बार पानी की आवक को याद करते हुए मधुमक्खियों के छत्ते का भी जिक्र किया।
लेखक अनिल जैन ने बताया कि आठ अध्यायों में विस्तारित पुस्तक में इतिहास, विकास का सफर, गाँव की संस्कृति, परंपराएं, जीवनशैली, त्योहार, रहन-सहन, मंदिर, तालाब, आंकड़े, लोग आदि को समेटा है। यहाँ की मिट्टी, खुशबू, आबोहवा, पेड़ पौधे, पहाड़, पगडंडियां, हवेलियां, कुएं, बाजार जैसी चीजों को भी समाहित किया है, जिससे पुस्तक और जीवंत हो उठी।
इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय फोटो जर्नलिस्ट दीपक शर्मा ने बताया कि पुस्तक में बूढ़े होते नीम के पेड़ की दशा और उससे संवाद लेखक की संवेदनशीलता को दर्शाती है। गाँव के बड़े बुजुर्गों, सरपंच आदि को भी स्थान दिया है। पुस्तक में वर्ष 1976 से 1981 के समय का खास विवरण है, जो कि ग्रामीण संस्कृति से रूबरू करता है। तत्कालीन समय की अनकही प्रचलित मान्यताएं, रहन सहन का सुंदर शब्द चित्र है। निश्चय ही आज की पीढ़ी को यह ग्रामीण संस्कृति से रूबरू कराने में सार्थक साबित होगी।
इस अवसर पर अनिल सालगिया भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि हाल ही में तालाब में पानी की अच्छी आवक से गाँव के फिर दिन फिरने लगे हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तक में तालाब के निर्माण से लेकर अब तक के सफर का सुंदर वर्णन है। तत्कालीन समय में गायी जाने वाली लूरों ने इसे और ऑर्नामेंटल बना दिया। पुस्तक में बीच-बीच में फोटो भी दी है। कुल मिलाकर ग्रामीण संस्कृति से रूबरू कराती यह पुस्तक पठनीय है। बीर वालों के लिए तो यह संग्रहणीय है।
श्रीमती अंजू जैन बताती है कि पुस्तक का सफर शून्य से शुरू हुआ, किंतु आज शिखर पर है। उन्होंने कहा कि लेखक ने तत्कालीन समय की भाट प्रथा का भी जिक्र किया है। इन्हीं के माध्यम से लेखक ने गाँव के इतिहास और बसावट को खंगालने का प्रयास किया है। स्थानीय अखबार, रेफरेंस बुक आदि का भी यथा स्थान उपयोग कर इसे प्रमाणिक बनाने का सुंदर प्रयास है। पुस्तक में कुल 152 पृष्ठ हैं।
पुस्तक का प्रकाशन अभिनव प्रकाशन अजमेर ने किया है। पुस्तक अमेजन पर उपलब्ध है, जिसका लिंक इस प्रकार है –