परिषद की फाल्गुन और चैत्र नववर्ष गोष्ठी हुई

अजमेर/चैत्र माह की प्रतिपदा को मनाया जाने वाला भारतीय नव वर्ष पूर्णतया प्रकृति और खगोलीय परिसंचालन पर आधारित होने के कारण प्रामाणिक और वैज्ञानिक है। अखिल भारतीय साहित्य परिषद अजमेर महानगर द्वारा रविवार को चरण शोध संस्थान भवन में आयोजित होली स्नेह मिलन गोष्ठी में यह विचार व्यक्त करते हुए मुख्य वक्ता उमेश कुमार चौरसिया ने संवत्सर और विक्रम संवत के वैशिष्ट्य पर चर्चा की। साहित्यकार गोविंद भारद्वाज के सरस संचालन में हुई गोष्ठी में विभाग संयोजक कुलदीपसिंह रत्नू, कोषप्रमुख विष्णु दत्त शर्मा, उपाध्यक्ष बनवारीलाल शर्मा, महिला प्रमुख डॉ पूनम पांडे, कविता जोशी, प्रदीप गुप्ता, काजल खत्री, विनीता निर्झर, संदीप पांडे, डॉ अंजू अग्रवाल, स्मिता भार्गव, मोहन खंडेलवाल, महेंद्र चौहान, रेखा शर्मा, राखी, योगबाला, लता शर्मा, चेतना उपाध्याय, शारदा, डीसी देवड़ा और कृष्ण मोहन रंगा आदि ने हास्य, व्यंग्य, उमंग और संस्कार से सराबोर गीत व कविताओं के रंग बिखेरे।

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