अजमेर पब्लिक स्कूल तथा सागर कॉलेज एवं मीनू स्कूल के परिसर में विद्यार्थियों, विद्यालय स्टाफ एवं अमेरिका से आये 20 विदेशी मेहमानों की मौजूदगी में लोक पर्व होली इको फ्रेंडली फेस्टिवल अबीर ग़ुलाल और फूलों के साथ रंगारंग नृत्य के साथ मनाया गया, जिसमे पानी का बिलकुल उपयोग नहीं हुआ हानिकारक केमिकल रंग से भी परहेज किया गया । अणुव्रत समिति अजमेर के अध्यक्ष बी. एल. सामरा ने अणुव्रत आंदोलन की स्थापना के 78 वर्ष की पूर्णता के पूर्व दिवस पर आयोजित समारोह मे सभी आगंतुक समुदाय को सम्बोधित करते हुए अणुव्रत विश्व भारती की इको फ्रेंडली फेस्टिवल मुहीम की चर्चा करते हुए अणुव्रत की जानकारी विभिन्न गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए स्वच्छ पर्यावरण, नशा मुक्त स्वस्थ समाज एवं सद्भावना पूर्ण विश्व में शांति मय माहौल में जीओ और जीने दो संकल्पना और युवा पीढ़ी मे संस्कार निर्माण पर बल दिया और कहा कि हमारी संस्कृति तभी तक सुरक्षित जब तक युवा पीढ़ी में संस्कार सुरक्षित है । अणुव्रत आंदोलन की आज की दुनियां मे
प्रासंगिकता का जिक्र करते हुए उन्होंने बच्चों को सेवा,सदभाव और व्यसन मुक्त जीवन अपना कर अपने माता पिता और गुरुजनों का सम्मान कर उनके आशीर्वाद का पात्र बनना सफल जीवन के लिए जरुरी बताया अपने जीवन और बचपन का जिक्र कर प्रेरणा देते हुए कहा कि मै आज जिस मुकाम पर पहुँचा हूँ, वह माता पिता के आशीर्वाद की बदौलत ही संभव हुआ है।
मुझे इस बात का गर्व है कि मै एक ऐसे पिता की संतान हूँ, जिन्होंने अपने जीवन का बहुत बड़ा हिस्सा न केवल अपने माता पिता बल्कि अपने सास ससुर जी की सेवा मे गुजार दिया और जिसकी कोई मिसाल आज के दौर मिलना कठिन है। उन्हें इस युग का श्रवण कुमार कहेंगे तो उसमे कोई अतीश्योक्ति नहीं है क्योंकि अपने माता पिता के इकलौते पुत्र होने के बावजूद उन्होंने हमारी दादी जी की अपाहिज अवस्था मे जो सेवा सुश्रुसा की 18 वर्षो तक
चारपाई में लेटी हुई स्थिति मे वह तो बेमिसाल है क्योंकि लकवा ग्रस्त काया कोई भी अंग हिलने डुलने उठने बैठने मे एकदम असक्षम था और उस अवस्था में भी उनकी प्रत्येक इच्छा का सम्मान जीवन पर्यन्त किया. मै अपने आप को अत्यंत सौभाग्य शाली मानता हूँ कि आज हमारे परिवार का खुशहाल जीवन उन्हीं के आशीर्वाद की बदौलत है। मेरे माताजी औऱ पिता जी दोनों के कोई भाई नहीं था फिर भी माता पिता की सेवा मे अपने जीवन का अनमोल समय व्यतीत करते हुए हम पांच भाई बहनो की अच्छी परवरिश की. धन्य पिताजी आपकी सेवा कों नमन करते हुए बारम्बार प्रणाम करता हूँ । आप सभी विद्यार्थियों से मेरी गुजारिश है, अपने माता पिता और गुरुजनों का कभी अपमान और अवहेलना नहीं करें, उनके हम पर अनंत उपकार है। चुगली,चोरी और नशे से पूरी तरह परहेज कर अच्छे नागरिक बनकर अपने माता पिता गुरुजनों के साथ अपने परिवार समाज और देश का नाम रोशन करें !