अजमेर, 9 जून। आगामी खरीफ की फसल के दौरान मूंगफली की फसल में उन्नत तकनीक अपनाकर कृषक उत्पादन को बढ़ा सकते है।
ग्राहृय परीक्षण केन्द्र के कार्यवाहक उप निदेशक कृषि (शस्य) डॉ. जितेन्द्र शर्मा ने बताया कि मूंगफली की बुवाई जून के प्रथम सप्ताह से द्वितीय सप्ताह तक की जाती है। मूंगफली उत्पादन में बढोत्तरी के लिए उन्नत शष्य क्रियाओं के साथ-साथ फसल को कीटों एवं रोगों से बचाना भी अति आवश्यक है। कृषि रसायनों का उपयोग करते समय हाथों में दस्ताने, मुंह पर मास्क तथा पूरे वस्त्र पहनें। किसान फफूंदनाशी, कीटनाशी से बीजों को उपचारित करने के बाद ही राइजोबियम जीवाणु कल्चर से बीजों को उपचारित करें। कॉलर रॉट रोग से बचाव के लिए बुवाई से पूर्व 2.5 किलो ट्राइकोडर्मा 100 किलो गोबर में मिलाकर एक हैक्टेयर क्षेत्र में मिलाएं। साथ ही कार्बोक्सिन 37.5 प्रतिशत तथा थाइरम 37.5 प्रतिशत का 3 ग्राम या मैन्कोजेब 2 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से बीजोपचार करें।
सहायक कृषि अनुसंधान अधिकारी (कीट) डॉ. सुरेश चौधरी ने मूंगफली की फसल को भूमिगत कीट सफेद लट से बचाने के लिए इमिडाक्लोप्रिड 600 एफएस की 6.5 मिली प्रति किलो बीज या क्लोथायोनिडिन 50 डब्ल्यूडीजी 2 ग्राम प्रति किलो बीज को उपचारित करें। बीज को 2 घण्टे छाया में सुखाकर बुवाई करें।
कृषि अनुसंधान अधिकारी (रसायन) डॉ. कमलेश चौधरी ने मृदा जांच अनुसार उर्वरकों के प्रयोग की सलाह दी। मृदा जांच के अभाव में बुवाई से पूर्व प्रति हैक्टेयर 375 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट एवं 32 किलो यूरिया अथवा 130 किलो डीएपी नायले से ऊर कर देवें। पोटाश की कमी वाले क्षेत्रों में 30 किलो पोटाश बुवाई से पूर्व डालें।
कृषि अनुसंधान अधिकारी (शस्य) श्री राम करण जाट ने बताया कि मूंगफली में खरपतवार प्रबंधन के लिए बुवाई के तुरन्त बाद पेन्डीमिथालीन (30 प्रतिशत) और ईमिजाथापर (2 प्रतिशत) उपलब्ध मिश्रित शाकनाशी 2.5 लीटर प्रति हैक्टेयर की दर से छिड़काव करें। पेन्डीमिथालीन (30 प्रतिशत) शाकनाशी 3.3 लीटर प्रति हैक्टेयर की दर से छिड़काव करें एवं 30 दिन बाद निराई-गुड़ाई करें।