अजमेर, 11 जून। कपास की फसल पर हरा तेला, सफेद मक्खी, थ्रिप्स, माइट तथा मिलीबग आदि रस चूसने वाले कीटों के प्रकोप के कारण होने वाली हानि से बचाव के संबंध में ग्राहृय परीक्षण केन्द्र के कार्यवाहक उप निदेशक कृषि (शस्य) डॉ. जितेन्द्र शर्मा के द्वारा जानकारी दी गई।
सहायक कृषि अनुसंधान अधिकारी (कीट) डॉ. सुरेश चौधरी ने बताया कि हरा तेला एवं सफेद मक्खी के निम्फ तथा वयस्क कीट पत्तियों से रस चूसकर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। इनके प्रकोप से पत्तियों के किनारे पीले पड़ जाते हैं तथा पत्तियां नीचे की ओर मुड़ने लगती हैं। सफेद मक्खी पत्तियों की निचली सतह से रस चूसती है तथा शहद जैसा चिपचिपा पदार्थ छोड़ती है। इसके कारण पत्तियों पर काली फफूंद (सूटी मोल्ड) विकसित हो जाती है। इससे पत्तियां राख जैसी एवं तेलीय दिखाई देने लगती हैं तथा प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है। किसानों से अनुरोध है कि वे नियमित रूप से फसल का निरीक्षण करें तथा कीटों का प्रकोप दिखाई देने पर निम्न में से किसी एक अनुशंसित कीटनाशक जैसे इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल का 0.3 मिली अथवा थायोमेथोक्साम 25 डब्ल्यूजी का 0.5 ग्राम अथवा एसिटामिप्रिड 20 एसपी का 0.4 ग्राम अथवा थायोक्लोप्रिड 240 एससी का 1.0 मिली अथवा डाईफेन्थूरान 50 डब्ल्यूपी का 2 ग्राम का प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
किसान छिड़काव के समय हाथों में दस्ताने, मुंह पर मास्क, पूरे वस्त्र पहनें तथा आवश्यक सुरक्षा उपाय अवश्य अपनाएं।