भागवत कथा के अमृत से सराबोर हुआ अजमेर

भाव-विभोर श्रद्धालुओं के बीच सम्पन्न हुई श्रीमद्भागवत कथा
डॉ. संजय कृष्ण सलिल जी महाराज के ओजस्वी वचनों ने दिया भक्ति, सेवा और सद्कर्म का संदेश
भजनों की मधुर रसधारा में झूमे श्रद्धालु, जीवन को ‘सात दिन की भागवत’ बताकर कराया आत्मचिंतन

अजमेर। ज्ञान विहार स्थित श्री कल्याण जी मंदिर में कालीचरण खंडेलवाल परिवार के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सोमवार को भक्तिभाव और आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हो गई। समापन अवसर पर आयोजक कालीचरण खंडेलवाल ने अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक डॉ. संजय कृष्ण सलिल जी महाराज का अलौकिक एवं भावपूर्ण कथा-वाचन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सरल भाषा, प्रभावशाली भाव-चित्रण और आध्यात्मिक व्याख्या ने अजमेरवासियों के हृदय में भक्ति का नया प्रकाश जगाया है।

समापन दिवस पर डॉ. संजय कृष्ण सलिल जी महाराज द्वारा प्रस्तुत “हमने भरोसा कर लिया सरकार श्याम का”, “आसरा एक तेरा, एक तेरा सहारा”, “मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो” तथा “अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो” जैसे मधुर भजनों ने पूरे पंडाल को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। श्रद्धालु भक्ति की धुन पर झूम उठे और पूरा वातावरण राधे-कृष्ण के जयघोष से गुंजायमान हो गया।

कथा के दौरान महाराज श्री ने कहा कि ठाकुर जी की कथा का वास्तविक आनंद तभी प्राप्त होता है जब श्रोता स्वयं को उसमें पूर्णतः समर्पित कर दें। उन्होंने कहा कि जीवन क्षणभंगुर है और वास्तव में यह भी सात दिनों की भागवत के समान है, जो सोमवार से रविवार तक चलकर पुनः नए आरम्भ का संदेश देता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को शुभ कार्यों में विलंब नहीं करना चाहिए तथा जीवन का प्रत्येक क्षण भगवान के स्मरण, सेवा और सद्कर्मों में लगाना चाहिए।

जय अम्बे सेवा समिति द्वारा संचालित वृद्धाश्रम से कथा श्रवण के लिए आए बुजुर्गों को संबोधित करते हुए महाराज श्री ने कहा कि बीते हुए जीवन की घटनाओं को भूलकर शेष समय भगवद् चिंतन और प्रभु भक्ति में व्यतीत करें। उन्होंने कहा कि वास्तविक दरिद्रता धन के अभाव में नहीं, बल्कि धन होते हुए भी उसे सद्कार्यों में उपयोग न करने की प्रवृत्ति में है।

उन्होंने कहा कि भागवत कोई प्राचीन ग्रंथ मात्र नहीं, बल्कि नित्य नवीन जीवन-दर्शन है। इसकी शिक्षाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं और मानव समाज को सत्य, सेवा, करुणा एवं धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। धर्मनिष्ठ, सेवाभावी तथा दूसरों के दुःख को अपना समझकर तत्काल सहायता करने वाले व्यक्ति ही ईश्वर की विशेष कृपा के पात्र बनते हैं।

कथा प्रवक्ता उमेश गर्ग ने बताया कि समापन दिवस पर श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह, भगवान के अन्य दिव्य विवाह, स्यमंतक मणि प्रसंग, कृष्ण पर लगे आरोप एवं मणि की पुनः प्राप्ति, सत्यभामा विवाह, भगवान की आठ पटरानियों एवं सोलह हजार रानियों का आध्यात्मिक रहस्य, जरासंध वध, युधिष्ठिर का राजतिलक, सुदामा-कृष्ण मिलन, उद्धव उपदेश, भगवान श्रीकृष्ण का निजधाम गमन, द्वारिका का विलय तथा राजा परीक्षित के देवलोक गमन सहित अनेक दिव्य प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण एवं मार्मिक वर्णन किया गया।

कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने प्रभु श्रीकृष्ण के श्रीचरणों में सुख, शांति एवं विश्व कल्याण की मंगलकामना करते हुए भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

उमेश गर्ग
9829793705

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