सहकारिता की जननी है कांग्रेस, ‘भाजपाकरण’ से बर्बाद हो जाएगा 8 करोड़ किसानों का भविष्य

“सहकारिता का राजनीतिकरण बर्दाश्त नहीं, जरूरत पड़ी तो जंतर-मंतर पर होगा विशाल धरना और सुप्रीम कोर्ट का खटखटाएंगे दरवाजा”*
**भारत में सहकारिता की असली जननी कांग्रेस ही है, जिसने अपने प्रयासों से इसे विश्व में नई पहचान दिलाई और देश को श्वेत क्रांति में शीर्ष पर पहुंचाया।**
अजमेर:
सहकारिता के क्षेत्र में केंद्र की भाजपा सरकार की नई नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए अजमेर डेयरी अध्यक्ष और वरिष्ठ सहकारिता नेता रामचंद्र चौधरी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ‘सरदार पटेल को-ऑपरेटिव डेयरी फैडरेशन लि. (SPCDF) मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटी’ के गठन की आड़ में देश के दशकों पुराने और मजबूत त्रि-स्तरीय सहकारी तंत्र को पूरी तरह से नष्ट करना चाहती है। उन्होंने चेतावनी दी कि सहकारिता का यह ‘भाजपाकरण’ देश के 8 करोड़ दुग्ध उत्पादक किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गर्त में धकेल देगा।
कांग्रेस के दिग्गजों ने खड़ी की थी श्वेत क्रांति की नींव
चौधरी ने याद दिलाया कि भारत में सहकारिता और श्वेत क्रांति की असली जननी कांग्रेस ही है। पंडित जवाहरलाल नेहरू के दूरदर्शी प्रयासों से इफको (IFFCO), कृभको (KRIBHCO) और नेफेड (NAFED) जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं का जन्म हुआ, जिन्होंने सहकारिता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। सरदार वल्लभ भाई पटेल, मोरारजी देसाई, लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी जैसे महान नेताओं के संरक्षण में देश के लाखों गांवों में त्रि-स्तरीय सहकारी ढांचा (ग्राम स्तर पर प्राथमिक समिति, जिला स्तर पर जिला दुग्ध संघ और राज्य स्तर पर फेडरेशन) विकसित हुआ। इसी मजबूत व्यवस्था के दम पर आज NDDB, NCDC और NCUI जैसी संस्थाएं दुनिया भर में भारत का नाम रोशन कर रही हैं।
SPCDF मल्टी स्टेट सोसायटी के जरिए लाखों समितियों को खत्म करने की साजिश :- रामचंद्र चौधरी ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा सरकार अब इस स्थापित तंत्र को पूरी तरह खत्म करना चाहती है। सरदार पटेल को-ऑपरेटिव डेयरी फैडरेशन लि. (SPCDF) जैसी मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटी का नया ढांचा थोपकर पूर्व से संचालित लाखों स्थानीय सहकारी समितियों को समाप्त करने की तैयारी की जा रही है। इस नई व्यवस्था के जरिए पूरे देश में केवल अमूल (Amul) की शाखाओं को थोपने की कोशिश की जा रही है, जो पहले से सुचारू रूप से चल रही व्यवस्था को पूरी तरह बर्बाद कर देगी। यह विनाशकारी नीति न केवल दुग्ध उत्पादन, मत्स्य, बल्कि गन्ना, फल-सब्जी और कपड़ा (टेक्सटाइल व शुगर) जैसे महत्वपूर्ण सहकारी क्षेत्रों को भी तबाह कर देगी।
‘थोथा चना बाजे घणा’, सम्मेलन में पहुंचे मात्र एक मुख्यमंत्री :-
दिल्ली के भारत मंडपम में हाल ही में आयोजित सहकारिता विभाग के महाअधिवेशन पर तंज कसते हुए चौधरी ने कहा कि वहां केवल हवाई किले बनाए जा रहे थे। इस कार्यक्रम ने “थोथा चना बाजे घणा” की कहावत को सच साबित कर दिया। इस राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में देश भर से मात्र एक ही मुख्यमंत्री का शामिल होना यह साफ तौर पर दर्शाता है कि देश के अधिकांश राज्य और उनके मुख्यमंत्री केंद्र सरकार की इस नई और मनमानी नीति से कतई सहमत नहीं हैं। इसके अलावा, सहकारिता क्षेत्र से जुड़े कांग्रेस पृष्ठभूमि के जनप्रतिनिधियों को इस सम्मेलन से दूर रखकर भाजपा ने अपनी संकीर्ण और राजनैतिक मानसिकता का परिचय दिया है। चौधरी ने नसीहत दी कि भाजपा के शीर्ष सहकारी नेतृत्व को पहले शरद पवार जैसे अनुभवी और जमीनी नेताओं से सहकारिता का वास्तविक ज्ञान अर्जित करना चाहिए।
जंतर-मंतर पर विशाल धरने और सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी :-
अजमेर डेयरी अध्यक्ष ने केंद्र सरकार को दोटूक शब्दों में सचेत करते हुए कहा कि अपने चरम और यौवन पर पहुंच चुकी पुरानी सहकारी व्यवस्था के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ देश की 8 करोड़ किसान जनता बर्दाश्त नहीं करेगी। यदि सरकार ने SPCDF मल्टी स्टेट सोसायटी के जरिए स्थानीय ढांचे को कुचलने का प्रयास बंद नहीं किया, तो देश भर के सहकारी प्रतिनिधि दिल्ली के जंतर-मंतर पर ऐतिहासिक और विशाल धरना-प्रदर्शन करेंगे। जरूरत पड़ने पर किसानों के हक़ और सहकारिता के वजूद को बचाने के लिए देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।

Leave a Comment

This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

error: Content is protected !!