प्रबंध बोर्ड की बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं विकासात्मक विषयों पर लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय

अजमेर, 18 जुलाई। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के अशोक कक्ष में शनिवार को आयोजित प्रबंध बोर्ड की 115वीं बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, प्रशासनिक, वित्तीय, आधारभूत  संरचनात्मक एवं छात्र हित से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया तथा विभिन्न प्रस्तावों को अनुमोदन प्रदान किया गया।

बैठक की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने की। बैठक में प्रबंध मंडल के माननीय सदस्यों, जनप्रतिनिधियों एवं विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने विश्वविद्यालय के समग्र विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध, परीक्षा प्रणाली तथा भावी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की।

बैठक के प्रारम्भ में कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने अपने एक वर्ष के कार्यकाल का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन, शैक्षणिक सुधारों, शोध गतिविधियों, अधोसंरचना विकास, डिजिटल प्रशासन, छात्र कल्याण योजनाओं तथा वित्तीय अनुशासन की दिशा में किए गए कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने आगामी वर्ष के लिए NAAC प्रत्यायन, NIRF रैंकिंग, शिक्षकों की भर्ती, शोध परियोजनाओं के विस्तार तथा विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि को विश्वविद्यालय की प्रमुख प्राथमिकताएं बताया।

बैठक में प्रबंध मंडल की पूर्व बैठक की कार्यवाही एवं अनुपालना प्रतिवेदन का अनुमोदन किया गया। विद्या परिषद की 82वीं बैठक के निर्णयों की पुष्टि करते हुए आवश्यक संशोधन भी स्वीकृत किए गए। विश्वविद्यालय अधिनियम के अंतर्गत कुलगुरु द्वारा पारित विभिन्न प्रशासनिक आदेशों का अनुमोदन भी किया गया। बैठक में विश्वविद्यालय कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपात्मक नियुक्ति प्रदान किए जाने के आदेशों की पुष्टि की गई। साथ ही पेंशनरों एवं पारिवारिक पेंशनरों को राज्य सरकार द्वारा घोषित महंगाई राहत में वृद्धि के आदेशों का भी अनुमोदन किया गया। विश्वविद्यालय के विभिन्न सेवा एवं कार्मिक मामलों पर भी गंभीरता से विचार किया गया। सहायकों के वेतनमान संशोधन के लिए समिति के गठन एवं सहायक कर्मचारियों के ग्रेड-पे संबंधी प्रकरण पर विस्तृत परीक्षण के लिए पेंशन लाभ प्रदान करने संबंधी विषय पर राज्य सरकार से आवश्यक वित्तीय स्वीकृति प्राप्त करने का निर्णय लिया गया।

बैठक में विश्वविद्यालय खेल बोर्ड की अनुशंसाओं पर विचार करते हुए खेल गतिविधियों को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर बल दिया गया। साथ ही यह निर्णय लिया गया कि भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के आयोजन पर विश्वविद्यालय की तैयारियों एवं उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा। स्वदेशी कंसोर्टियम के प्रभावी संचालन हेतु एक प्रतिष्ठित संस्था के साथ सहभागिता विकसित करने तथा इसके संचालन संबंधी विस्तृत नियमावली तैयार करने के लिए समिति गठित करने का निर्णय भी बैठक में लिया गया।

बैठक के दौरान विश्वविद्यालय परिसर से अतिक्रमण हटाने, रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां करने, शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने, एनसीसी इकाई प्रारम्भ करने, अधोसंरचना विकास, जल प्रबंधन तथा परिसर सुरक्षा को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर भी सदस्यों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। जनप्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय परिसर से अतिक्रमण हटाने तथा लंबित प्रशासनिक मामलों के शीघ्र समाधान हेतु आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।

परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने के संबंध में भी विस्तृत चर्चा हुई। सदस्यों ने नकल रोकने के लिए अपनाई गई कठोर व्यवस्था की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि परीक्षा की शुचिता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा तथा जिन परीक्षा केन्द्रों पर अनियमितताएं पाई जाएंगी, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

बैठक में विश्वविद्यालय के वित्तीय अनुशासन, डिजिटल प्रशासन, शोध संस्कृति, उद्योग एवं संस्थागत सहयोग, छात्र हितैषी योजनाओं तथा परिसर विकास के विभिन्न प्रस्तावों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। प्रबंध मंडल ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा किए जा रहे सुधारात्मक प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट संस्थान के रूप में विकसित करने के लिए आवश्यक सहयोग देने का विश्वास व्यक्त किया।

बैठक के अंत में कुलगुरु ने सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रबंध मंडल के मार्गदर्शन एवं सहयोग से विश्वविद्यालय को शैक्षणिक उत्कृष्टता, गुणवत्तापूर्ण शोध एवं सुशासन के नए आयामों तक पहुंचाने का प्रयास निरंतर जारी रहेगा।

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