सिन्ध के सपूत बलिदानी राणा रतनसिंह के शौर्य पर संगोष्ठी का आयोजन

अजमेर 21 अगस्त- 1857 की क्रांति के नायक सिंध के क्रांतिकारी राणा रतनसिंह के प्रपोत्र जोधपुर निवासी रघुवीर सिंह सोढा ने आज सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन स्मारक पर सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन की 1357वीं जयंती समारोह के अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी आयोजित की गई।
मुख्य अतिथि सोढा ने कहा है कि स्वतन्त्रता-संग्राम सेनानी शहीद राणा रतनसिंह जी सोढ़ा का जन्म 19वीं शताब्दी के तीसरे दशक में सोढ़ा शासकों के आधिपत्य वाले अमरकोट, धाट (सिंध) में हुआ था। ब्रिटिश साम्राज्य ने अमरकोट के धाट क्षेत्र को अपने अधीन करने के लिए प्रतिनिधि नियुक्त किये। राणा रतनसिंह और उनके सहयोगी भगूजी संगरासी ने ब्रिटिश शासन का विरोध किया एवं उसके अत्याचारों से मुक्ति हेतु प्रतिनिधि को मौत के घाट उतार कर सन् 1857 की स्वातन्त्र्य ज्वाला को प्रज्ज्वलित रखा। ब्रिटिश सेना ने क्रान्तिकारी राणा रतनसिंह को गिरफ्तार कर फांसी पर चढ़ा दिया और उनके साथी भगूजी को कालापानी की सजा सुनाई। राणा रतन सिंह की शूरता, स्वातन्त्र्य-प्रेम और बलिदान की गाथा के प्रेरणादायी लोकगीत आज भी सिंध और राजस्थान में गाये जाते हैं
जिसमें प्रमुख गीतों में म्हारा रतन राणा, एकर तो अमराणें घुड़लो पाछो घेर, अमर राणें में बोले सूवा मोर, हो जी हो, म्हारा रतन राणा, अमराणें में बोले सूवा मोर, बागां में बोले काळी कोयलड़ी रे, म्हारा सायर सोढा एकर सूं अमराणें घुड़लो घेर !!1!! केहर लंकी गौरियां, सोढ़ा भंवर सुजांण। वड झुकियॉ लांबैसरा अइयो धर सोढांण।।
वर्तमान में सिंध प्रांत की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है इसे अखंड भारत का हिस्सा बनने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है सिंध के आजाद होने के उपरांत ही वहां विकास संभव होगा सिन्ध के गौरव के इतिहासकार जोधपुर के सदैव राणा रतन सिंह की नेतृत्व में अंग्रेजी शासन का विरोध करता रहा और उन्होंने अपने प्राण न्योछावर किया

विशिष्ट अतिथि बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता चंद्रभान सिंह राठौड ने कहा कि अंग्रेजी शासन काल में इस बात का प्रयास किया गया कि भारत को आर्थिक रूप से अधिक से अधिक कमजोर किया जाए इस तरह की संगोष्ठी के माध्यम से हम इतिहास के महापुरुषों को बलिदानों से प्रेरणा लेकर नए राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं

अध्यक्षता करते हुये पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी महावीर सिंह ने कहा कि वर्तमान में सिंध प्रांत की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है इसे अखंड भारत का हिस्सा बनने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है सिंध के आजाद होने के उपरांत ही वहां विकास संभव होगा।
राजस्थान धरोहर प्राधिकरण के पूर्व सदस्य कंवल प्रकाश किशनानी ने स्वागत भाषण व समारोह का संचालन भारतीय सिंधु सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेन्द्र कुमार तीर्थाणी ने किया।  संयोजक शैलेंद्र सिंह परमार ने आभार व्यक्त किया। समारोह समिति के विनीत लोहिया, रेखा गोयल, शिव प्रसाद गौतम, अजय कपूर, संदीप धाबाई, सुनील तिवारी, विजय दिवाकर, सुरेन्द्र सिंह, हितेश सिंह चौहान, दातार सिंह, अनिल सिंह, अनीश कपूर सहित कार्यकर्ता उपस्थित थे।

शनिवार को आयोजित होने वाले कार्यक्रम
शनिवार 22 अगस्त प्रातः 10 बजे शहीद रूपलो कोल्ही के बलिदान दिवस पर पुष्पांजलि व संगोष्ठी का आयोजन दाहरसेन स्मारक पर रखा गया है।

कवंलप्रकाश किशनानी,
मो.9829070059

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