RPSC चयन में एमडीएसयू के शोधार्थियों की सफलता, विश्वविद्यालय में प्रतिभा संवर्धन और प्लेसमेंट प्रयासों को मिली नई पहचान
अजमेर। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में विद्यार्थियों और शोधार्थियों को केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित न रखते हुए उन्हें शोध, कौशल, नवाचार और रोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयासों को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा प्राणीशास्त्र विषय में सहायक आचार्य पद के लिए जारी चयन सूची में विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग के दो सीनियर रिसर्च फेलो (SRF) शोधार्थियों का चयन हुआ है।
विभागाध्यक्ष प्रो. सुभाष चंद्र के निर्देशन में शोधरत पंकज यादव और दिनेश कुमार सैनी की यह उपलब्धि महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शोध, अकादमिक मार्गदर्शन और विद्यार्थियों की कैरियर उन्नति के लिए विकसित हो रहे सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
चयनित शोधार्थी पंकज यादव सांभर झील में Zooplankton Diversity पर शोध कार्य कर रहे हैं, जबकि दिनेश कुमार सैनी सेंट्रल अरावली क्षेत्र में Spider Diversity पर शोधरत हैं। दोनों शोधार्थियों के शोध-पत्र हाल ही में विश्व स्तरीय शोध जर्नलों में प्रकाशित हुए हैं। इस प्रकार उनका चयन इस बात का भी प्रमाण है कि उच्चस्तरीय शोध और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी को समन्वित रूप से आगे बढ़ाते हुए शोधार्थी अकादमिक करियर में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
विभागों की सक्रिय भूमिका से बन रहा सफलता का नया वातावरण
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में विद्यार्थियों और शोधार्थियों को उनके विषयगत ज्ञान के साथ-साथ उच्च शिक्षा, शोध, प्रतियोगी परीक्षाओं, शिक्षण, सरकारी सेवाओं तथा अन्य कैरियर अवसरों के लिए मार्गदर्शन प्रदान करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। विभागीय स्तर पर शिक्षकों और शोध-निर्देशकों द्वारा शोधार्थियों को नवीनतम विषयों पर शोध, गुणवत्तापूर्ण प्रकाशन, अकादमिक लेखन और करियर उन्मुख तैयारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
प्राणीशास्त्र विभाग की यह उपलब्धि इसी व्यापक शैक्षणिक सोच का परिणाम है, जिसमें शोध को केवल उपाधि प्राप्त करने का माध्यम न मानकर विद्यार्थियों और शोधार्थियों के व्यक्तित्व, विशेषज्ञता तथा रोजगार क्षमता के विकास से जोड़ा जा रहा है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐसी अकादमिक और व्यावसायिक दक्षताओं से सशक्त बनाना है, जिससे वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध अवसरों का सफलतापूर्वक लाभ उठा सकें।
विभागाध्यक्ष प्रो. सुभाष चंद्र ने दोनों शोधार्थियों की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि RPSC के माध्यम से सहायक आचार्य पद पर उनका चयन प्राणीशास्त्र विभाग और विश्वविद्यालय परिवार के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि दोनों शोधार्थियों ने अपने शोध कार्य के साथ अकादमिक उत्कृष्टता और प्रतियोगी तैयारी का प्रभावी संतुलन स्थापित किया है। उनकी सफलता विभाग के अन्य शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक है।
शोधार्थियों की सफलता को रोजगारोन्मुख शिक्षा से जोड़ने पर जोर
विश्वविद्यालय में शोध और शिक्षण की गुणवत्ता को विद्यार्थियों के भविष्य से जोड़ने पर विशेष बल दिया जा रहा है। विभिन्न विभागों द्वारा अपने-अपने विषयों की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों को मार्गदर्शन, शोध के अवसर, विशेषज्ञता विकास और कैरियर उन्मुख तैयारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ऐसे प्रयासों का उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसर में एक ऐसा वातावरण विकसित करना है, जहां शोध से नवाचार, ज्ञान से कौशल और शिक्षा से रोजगार तक की एक सशक्त श्रृंखला निर्मित हो।
पंकज यादव और दिनेश कुमार सैनी का सहायक आचार्य पद पर चयन विश्वविद्यालय के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यह सफलता उच्च शिक्षा संस्थानों में शोधार्थियों की रोजगारपरक तैयारी और विभागीय मार्गदर्शन की भूमिका को रेखांकित करती है। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि प्रत्येक विभाग अपने विद्यार्थियों और शोधार्थियों की प्रतिभा, विषयगत क्षमता और कैरियर लक्ष्यों के अनुरूप उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रभावी अकादमिक सहयोग प्रदान करे।
कुलगुरु ने दी बधाई, कहा— प्रतिभा को अवसरों से जोड़ना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने दोनों शोधार्थियों के RPSC के माध्यम से सहायक आचार्य पद पर चयन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शोधार्थियों की सफलता ही किसी भी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और मार्गदर्शन की वास्तविक पहचान होती है।
कुलगुरु प्रो. अग्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षा और शोध को समकालीन आवश्यकताओं तथा रोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में सतत प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न विभागों को इस बात के लिए प्रेरित किया जा रहा है कि वे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि उनकी प्रतिभा को पहचानकर उन्हें शोध, नवाचार, प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा और रोजगार के विविध अवसरों के लिए तैयार करें।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की वास्तविक सफलता तब मानी जाती है, जब उसके विद्यार्थी और शोधार्थी समाज तथा राष्ट्र की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने में अपनी भूमिका निभाएं। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के प्रत्येक विभाग में ऐसा प्रेरक और परिणामोन्मुख शैक्षणिक वातावरण विकसित हो, जिसमें विद्यार्थियों को सीखने से आगे बढ़कर सफलता प्राप्त करने के लिए आवश्यक अवसर, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास प्राप्त हो।
प्राणीशास्त्र विभाग के दोनों शोधार्थियों की सफलता ने एमडीएसयू की इस दिशा में बढ़ती शैक्षणिक और कैरियर उन्मुख पहलों को नई ऊर्जा दी है। विश्वविद्यालय परिवार ने दोनों चयनित शोधार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।
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