गणेश चतुर्थी पर MDSU में मनाया गया ‘आत्म-परिष्कार दिवस’

कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा—व्यक्ति का परिष्कार ही संस्थागत परिवर्तन की पहली सीढ़ी

अजमेर, 14 सितम्बर। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर ‘आत्म-परिष्कार दिवस’ मनाया गया। इस अवसर पर चाणक्य भवन स्थित गणेश मंदिर में विधिवत यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने सहभागिता की। यज्ञ के उपरांत कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि गणेश चतुर्थी भगवान गणेश की आराधना के साथ-साथ बुद्धि, विवेक, आत्मसंयम और स्वयं के भीतर सकारात्मक परिवर्तन का संदेश देने वाला पर्व है। उन्होंने कहा कि आत्म-परिष्कार की शुरुआत स्वयं से होती है और प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर की कमजोरियों तथा अवांछित आदतों को पहचानकर उनमें सुधार का प्रयास करना चाहिए।

कुलगुरु ने कहा कि क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या, आलस्य, असहिष्णुता, नकारात्मक सोच और अनावश्यक डिजिटल आसक्ति जैसे आंतरिक अवरोध व्यक्ति के विकास में बाधक बनते हैं। इनसे मुक्त होने के साथ-साथ सत्यपूर्ण एवं सम्मानजनक वाणी, अनुशासन, समय की पाबंदी, शिष्टाचार, संवेदनशीलता और जिम्मेदार नागरिकता को जीवन में अपनाना आत्म-परिष्कार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों से योग, प्राणायाम और ध्यान के माध्यम से मानसिक एकाग्रता एवं भावनात्मक संतुलन विकसित करने तथा वेद, उपनिषद, भगवद्गीता एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के साहित्य के अध्ययन से जीवन-मूल्यों को समृद्ध करने का आह्वान किया। उन्होंने डिजिटल युग में सोशल मीडिया के विवेकपूर्ण उपयोग, भ्रामक सूचनाओं से सावधानी तथा अनुत्पादक स्क्रीन टाइम को कम करने पर भी जोर दिया।

प्रो. अग्रवाल ने कहा कि आत्म-परिष्कार केवल व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका प्रभाव विश्वविद्यालय की कार्यसंस्कृति और संस्थागत व्यवस्था में भी दिखाई देना चाहिए। उन्होंने परिसर की स्वच्छता, हरित परिसर, जल संरक्षण, कचरा पृथक्करण, प्लास्टिक न्यूनीकरण, अकादमिक ईमानदारी, शिक्षक-विद्यार्थी संवाद तथा सामाजिक सेवा जैसी गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने ‘एक विभाग—एक परिष्कार पहल’ का सुझाव देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के प्रत्येक विभाग एवं कार्यालय को अपनी एक ऐसी कमी चिन्हित करनी चाहिए, जिसमें निश्चित समयावधि में ठोस और मापनीय सुधार किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने स्तर पर एक सकारात्मक परिवर्तन का संकल्प ले तो सामूहिक रूप से विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और वातावरण में व्यापक बदलाव लाया जा सकता है।

कुलगुरु ने आत्म-परिष्कार का सरल सूत्र प्रस्तुत करते हुए कहा—“एक अवगुण छोड़ें, एक सद्गुण अपनाएं, एक सेवा कार्य करें और विश्वविद्यालय में एक सकारात्मक सुधार में योगदान दें।” उन्होंने कहा कि आत्म-परिष्कार दिवस का उद्देश्य केवल एक दिवस मनाना नहीं, बल्कि “उत्सव से चिंतन, चिंतन से आत्म-परिष्कार और आत्म-परिष्कार से संस्थागत परिवर्तन” की ऐसी सतत प्रक्रिया प्रारंभ करना है, जो विश्वविद्यालय को ज्ञान के साथ-साथ चरित्र, अनुशासन, संवेदना, सेवा और जिम्मेदार नागरिकता का केंद्र बनाए।

Leave a Comment

This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

error: Content is protected !!