श्री वर्द्धमान शिक्षण समिति में मनाया आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और क्षमायाचना का संवत्सरी महापर्व

श्री वर्द्धमान शिक्षण समिति में आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और क्षमाभाव के पावन संदेश के साथ संवत्सरी महापर्व श्रद्धा एवं भावपूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारीगण, सदस्यगण, विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के प्राचार्य, शिक्षकगण, कर्मचारीगण एवं छात्र-छात्राए आमने-सामने कतारबद्ध होकर खड़े हुए और वर्षभर में हुई जाने-अनजाने की भूलों के लिए एक-दूसरे से क्षमा याचना करते हुए “मिच्छामि दुक्कडम्” कहा।

यह दृश्य केवल क्षमायाचना का नहीं, बल्कि अहंकार से विनम्रता, कटुता से मैत्री और आत्मचिंतन से आत्मशुद्धि की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक बना।

कार्यक्रम में श्री वर्द्धमान शिक्षण समिति के उपाध्यक्ष गौतमचंद बोहरा, ज्ञानचंद बिनायकिया, मंत्री डॉ. नरेन्द्र पारख, कोषाध्यक्ष देवराज लोढ़ा, सहमंत्री सुनील ओस्तवाल,  प्रकाशचन्द गदिया, के.सी. डोसी, रमेशचन्द मेड़तवाल, प्रवीण खेतपालिया, दीपचन्द कोठारी, वैभव सकलेचा, उत्तमचंद देरासरिया, धनपत राज श्री श्रीमाल, निर्मल कुमार मेहता, महाविद्यालय प्राचार्य डॉ आर सी लोढ़ा, बी एल गोठी पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य धर्मेंद्र शर्मा, श्री नृसिंह अग्रसेन जैन विद्यापीठ की प्राचार्या डॉ. निवेदिता पाठक, वर्द्धमान स्कूल के प्राचार्य अरविन्द नाहर एवं वर्द्धमान रूट्स की प्राचार्या श्वेता नाहर सहित समिति द्वारा संचालित समस्त शैक्षणिक इकाइयों के संकाय सदस्य एवं छात्र छात्राए उपस्थित रहे।

इस अवसर पर समिति के मंत्री डॉ. नरेन्द्र पारख ने संवत्सरी महापर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस महापर्व का मूल उद्देश्य आत्मा का विकास एवं आत्मशुद्धि है। उन्होंने कहा कि संवत्सरी केवल जैन धर्म का पर्व नहीं, बल्कि क्षमा, आत्मचिंतन और मैत्री का सार्वभौम संदेश देने वाला पर्व है।

महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. आर.सी. लोढ़ा ने पर्युषण पर्व को आत्मा के समीप रहने का पर्व बताते हुए कहा कि यह हमें बुरे कर्मों का त्याग कर सत्य, अहिंसा और आत्मसाधना के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। भगवान महावीर के सिद्धांतों को जीवन में आत्मसात करते हुए निरंतर धर्म और आत्मचिंतन की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

कार्यक्रम के अंत में समिति की ओर से सभी उपस्थितजनों को प्रभावना वितरित की गई। संवत्सरी के इस पावन अवसर पर “मिच्छामि दुक्कडम्” के साथ सभी ने मन में क्षमा, हृदय में मैत्री और जीवन में सद्भावना को अपनाने का संकल्प लिया।

Leave a Comment

This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

error: Content is protected !!