शपथ पत्र में संपत्ति, बैंक खाता, लोन व आय संबंधी तथ्य छिपाने का आरोप; नगर पालिका अधिनियम की धाराओं के तहत निर्वाचन को अवैध घोषित करने की मांग
अजमेर। नगर निगम चुनाव को लेकर वार्ड संख्या 14 से पार्षद अज़ह खान के निर्वाचन को चुनौती देते हुए कांग्रेस प्रत्याशी सैयदा वाहेद चिश्ती की ओर से अधिवक्ता धर्मेंद्र गहलोत, के जरिये चुनाव याचिका प्रस्तुत की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रत्याशी द्वारा नामांकन के साथ प्रस्तुत शपथ पत्र में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को कथित रूप से छिपाया गया तथा गलत एवं अपूर्ण जानकारी दी गई।
याचिका में कहा गया है कि प्रत्याशी ने अपने शपथ पत्र में कई स्थानों पर शून्य/शून्य उल्लेख किया, जबकि याचिकाकर्ता के अनुसार पूर्व में वर्ष 2021 के नगर निगम चुनाव के दौरान प्रस्तुत शपथ पत्र में कुछ अलग तथ्य दर्ज थे। याचिका में इसे जानबूझकर तथ्यों को छिपाने और मतदाताओं को वास्तविक जानकारी से वंचित रखने का आरोप लगाया गया है।
पूर्व शपथ पत्र से अलग जानकारी देने का आरोप
याचिका के अनुसार प्रत्याशी वर्ष 2021 में भी नगर निगम अजमेर के वार्ड 11 से पार्षद निर्वाचित हुआ था । याचिका में दावा किया गया है कि वर्ष 2021 में प्रस्तुत शपथ पत्र और वर्ष 2026 के चुनाव में प्रस्तुत शपथ पत्र की जानकारियों में अंतर है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि पूर्व में घोषित की गई संपत्ति एवं अन्य वित्तीय जानकारियों को वर्तमान शपथ पत्र में कथित रूप से छिपाया गया।
बैंक खाता और लोन की जानकारी छिपाने का आरोप
याचिका में एक बैंक खाते का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि खाते में राशि होने के बावजूद वर्तमान शपथ पत्र में संबंधित जानकारी कथित रूप से नहीं दर्शाई गई। साथ ही एक ऋण की मासिक किस्त बैंक खाते से कटने का भी दावा किया गया है, जबकि शपथ पत्र में लोन की जानकारी शून्य बताई गई।
याचिका में इन तथ्यों को छिपाने को शपथ पत्र में गलत जानकारी देने का आधार बताते हुए निर्वाचन को चुनौती दी गई है।
अचल संपत्ति को लेकर भी गंभीर आरोप
याचिका में अंदरकोट क्षेत्र में लगभग 85 गज के एक प्लॉट का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि पूर्व में इस संपत्ति का उल्लेख शपथ पत्र में किया गया था, लेकिन वर्ष 2026 के चुनाव के दौरान प्रस्तुत शपथ पत्र में कथित रूप से इसका उल्लेख नहीं किया गया।
याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि उक्त भूमि के संबंध में सरकारी रिकॉर्ड में खसरा संख्या दर्ज है और संपत्ति को लेकर प्रत्याशी के पास वैध दस्तावेज अथवा पट्टा नहीं होने का भी आरोप लगाया गया है। याचिका में इसे सरकारी भूमि पर कब्जे से संबंधित गंभीर आरोप के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
आय और संपत्ति संबंधी घोषणाओं पर भी सवाल
याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रत्याशी ने आजीविका, लोन, अचल संपत्ति तथा अन्य वित्तीय विवरणों के संबंध में शपथ पत्र में गलत अथवा अपूर्ण जानकारी दी। याचिकाकर्ता का कहना है कि शपथ पत्र में तथ्यों को जानबूझकर छिपाना निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं के सूचना के अधिकार को प्रभावित करता है।
नगर पालिका अधिनियम की धाराओं का हवाला
याचिका में राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 28, 29 एवं 35 सहित निर्वाचन अपराध एवं अयोग्यता से जुड़े प्रावधानों का हवाला दिया गया है। धारा 28 के अंतर्गत निर्वाचन संबंधी अपराधों तथा गलत/मिथ्या शपथ पत्र से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख करते हुए याचिकाकर्ता ने निर्वाचन को अवैध एवं शून्य घोषित करने की मांग की है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि निर्वाचन के दौरान प्रस्तुत शपथ पत्र में जानबूझकर महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया गया है तो ऐसे मामले में संबंधित प्रत्याशी की निर्वाचन योग्यता और निर्वाचित बने रहने के अधिकार नहीं है
आगामी सुनवाई की तारीख 9 अक्टुूरब शुक्रवार है।