कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस की कथित बर्बरता और मारपीट की भी निंदा, डॉ. राजकुमार जयपाल और शैलेश गुप्ता बोले—महिला सम्मान और लोकतांत्रिक अधिकारों के संरक्षण की आवश्यकता
अजमेर। एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव ऋतु बराला के साथ कथित मारपीट के मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पर राजस्थान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का करीब 43 घंटे तक चला धरना महिला सुरक्षा, पुलिस जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवालों को सामने लाता है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि न्याय की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस ने कथित रूप से बर्बरतापूर्ण व्यवहार और मारपीट की। कांग्रेस ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।धरने के बाद पुलिस प्रशासन द्वारा लिखित रूप में एफआईआर दर्ज करने से इनकार किए जाने का कांग्रेस ने दावा किया है। इसके बाद कांग्रेस ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है।
अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डॉ. राजकुमार जयपाल ने कहा कि ऋतु बराला प्रकरण में निष्पक्ष जांच, कानून के अनुरूप कार्रवाई और पीड़िता को न्याय मिलना आवश्यक है। किसी भी महिला की शिकायत को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। न्याय की मांग करना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। यदि इस अधिकार का इस्तेमाल करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट के आरोप सामने आते हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है और किसी भी बल प्रयोग को कानून, निर्धारित प्रक्रिया तथा परिस्थितियों के अनुरूप होना चाहिए।
डॉ. जयपाल ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई। वरिष्ठ नेताओं का पुलिस कमिश्नरेट पर धरने पर बैठना इस बात को रेखांकित करता है कि कांग्रेस पीड़िता को न्याय दिलाने और पुलिस प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा के सवाल पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए और पूरे प्रकरण में निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करनी चाहिए।
अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता शैलेश गुप्ता ने कहा कि भाजपा सरकार के शासन में यदि न्याय की मांग करने वाले कार्यकर्ताओं को पुलिस की कथित बर्बरता और मारपीट का सामना करना पड़ा है, तो पुलिस की कार्यप्रणाली और सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ कथित मारपीट लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने के अधिकार से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करती है। इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा यदि पुलिसकर्मी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस की मांग किसी व्यक्ति को राजनीतिक दबाव में दोषी ठहराने की नहीं, बल्कि शिकायत की निष्पक्ष जांच, कानून के समान अनुपालन और पीड़िता को न्याय दिलाने की है। पुलिस प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि एफआईआर दर्ज करने की मांग पर क्या निर्णय लिया गया और विरोध प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग की आवश्यकता किन परिस्थितियों में महसूस की गई। पुलिस कार्रवाई में घायल होने का दावा करने वाले लोगों के संबंध में भी उचित जांच और आवश्यक चिकित्सा सहायता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिला सम्मान, लोकतांत्रिक अधिकार और कानून के समक्ष समानता पर किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। कांग्रेस इस प्रकरण में पीड़िता को न्याय दिलाने, कार्यकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने और कथित पुलिस ज्यादती के आरोपों की जवाबदेही तय कराने के लिए लोकतांत्रिक एवं कानूनी तरीके से संघर्ष जारी रखेगी।
जारीकर्ता:
शैलेश गुप्ता
प्रवक्ता, अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी