अजमेर। सीरते पाक व जुमा कमेटी, कैरिज कारखाना के तत्वावधान में शनिवार को कैरिज कारखाने में जश्ने-ईद-मिलादुन्नबी का जलसा आयोजित किया गया। कैरिज कैंटीन के एकता हाल में हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैही वसल्लम की जिन्दगी और शिक्षा पर रोशनी डाली गई। इस मौके पर मुख्य अतिथि शिक्षा राज्यमंत्री नसीम अख्तर, मदरसा बोर्ड अध्यक्ष मौलाना फजले हक, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष लियाकत अली और मुख्य कारखाना प्रबंधक सुधीर गुप्ता थे। अध्यक्षता उपमुख्य यांत्रिक अभियंता सुरेशचंद ने की और विशिष्ट अतिथि पूर्व अंजुमन सदर सैयद गुलाम किबरिया चिश्ती, अजमेर जिला कल्याण अधिकारी उमरदराज खान, कार्यवाहक नाजिम दरगाह हाजी सद्दीक और सैयद इब्राहिम फखर, एसएफ हसन चिश्ती, मोहम्मद सलीम थे। महफिले रसूल का आगाज कुरआन पाक की तिलावत से किया गया और मौलाना मुफ्ती बशीरुल कादरी साहब ने मिलादे तकरीर का आगाज किया। महफिल में हाजी चांद खान और आदिल साहब ने नातों के नजराने पेश किये, जिसे सुन कर अकीदतमंद झूम उठे। महफिल में सभी वक्ताओं ने पैगम्बरे इस्लाम की नसीहतों और इंसानी भाईचारा और प्यार मोहब्बत के पैगाम पर रौशनी डाली। महफिल के आखिर में सभी लोगों ने सलातों-सलाम पढ़ा। इसके बाद दुआ खैर की गई और तबर्रुक तकसीम किया गया।कैरिज कारखाने में जश्न ए ईद मिलादुन्नबी
अजमेर। सीरते पाक व जुमा कमेटी, कैरिज कारखाना के तत्वावधान में शनिवार को कैरिज कारखाने में जश्ने-ईद-मिलादुन्नबी का जलसा आयोजित किया गया। कैरिज कैंटीन के एकता हाल में हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैही वसल्लम की जिन्दगी और शिक्षा पर रोशनी डाली गई। इस मौके पर मुख्य अतिथि शिक्षा राज्यमंत्री नसीम अख्तर, मदरसा बोर्ड अध्यक्ष मौलाना फजले हक, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष लियाकत अली और मुख्य कारखाना प्रबंधक सुधीर गुप्ता थे। अध्यक्षता उपमुख्य यांत्रिक अभियंता सुरेशचंद ने की और विशिष्ट अतिथि पूर्व अंजुमन सदर सैयद गुलाम किबरिया चिश्ती, अजमेर जिला कल्याण अधिकारी उमरदराज खान, कार्यवाहक नाजिम दरगाह हाजी सद्दीक और सैयद इब्राहिम फखर, एसएफ हसन चिश्ती, मोहम्मद सलीम थे। महफिले रसूल का आगाज कुरआन पाक की तिलावत से किया गया और मौलाना मुफ्ती बशीरुल कादरी साहब ने मिलादे तकरीर का आगाज किया। महफिल में हाजी चांद खान और आदिल साहब ने नातों के नजराने पेश किये, जिसे सुन कर अकीदतमंद झूम उठे। महफिल में सभी वक्ताओं ने पैगम्बरे इस्लाम की नसीहतों और इंसानी भाईचारा और प्यार मोहब्बत के पैगाम पर रौशनी डाली। महफिल के आखिर में सभी लोगों ने सलातों-सलाम पढ़ा। इसके बाद दुआ खैर की गई और तबर्रुक तकसीम किया गया।