अजमेर। कला अंकुर संस्था द्वारा 23 मार्च 2013 को षाम 7 बजे जवाहर रंगमंच, अजमेर पर भारतीय षास्त्रीय संगीत एवं राजस्थानी लोक संगीत पर आधारित युज़न कहरवा की अनूठी प्रस्तुति होगी। संस्था के संरंक्षक कमलेन्द्र झा ने बताया कि इस संगीतमय युज़न के ग्रुप लीडर राजस्थान के वरिष्ठ गायक श्री उमराव सालोदिया होंगे व इसकी परिकल्पना एवं निर्देषन प्रदेष के वरिष्ठ एवं जाने माने तबला वादक डॉ. विजय सिद्ध ने किया है। आयोजन के संयोजक श्री शरद गोयल ने बताया कि देष के अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकारों द्वारा प्रस्तुत कहरवा यूजन कहरवा ताल पर आधारित है। इसके अन्तर्गत सर्वाधिक प्रचलित ताल कहरवा पर आधारित सोलो कहरवा, राग देस पर आधारित देस कहरवा, प्रसिद्ध मांड केसरिया बालम पर आधारित मांड कहरवा, प्रसिद्ध लोक गीत हिचकी पर आधारित लोक कहरवा, बुल्लेषाह के कलाम पर आधारित जोग कहरवा, विभिन्न ताल वाद्यों द्वारा प्रस्तुत सबरंग कहरवा, सारंग कहरवा, प्रसिद्ध लोक भजन रूणी चेरा धणियां पर आधारित भक्ति कहरवा, मषहूर सूफी रचना छाप तिलक सब छीनी एवं राग यमन पर आधारित रचना सूफी कहरवा, बिरज में कैसे होली खेलूँगी सांवरिया तोरे संग पर आधारित होली कहरवा आदि रचनायें प्रस्तुत की जायेंगी। इसमें वरिष्ठ गायक उमराव सालोदिया, जाने माने तबला वादक डा. विजय सिद्ध, विख्यात गायक उस्ताद बून्दू खां लंगा, डा. विजयेन्द्र गौतम, सितार वादक, पं. हरिहरषरण भट्ट, ड्रम वादक योगेष षर्मा, मोरचंग एवं भपंग वादक रईस खां, सहित एक दर्जन कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे।
दुनिया में सबसे पहले कहरवा ताल की ही उत्पत्ति हुई है और आज के युग में भी कहरवा ताल विष्व संगीत में सर्वाधिक प्रचलित है। इसकी चंचल प्रकृति बरबस थिरकने को मजबूर कर देने वाली है। इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए कहरवा यूज़न के माध्यम से षास्त्रीय संगीत को सरलीकृत कर उसे लोकानुरंजक बनाने का एक सफल प्रयास है।
-डा. विजय सिद्ध
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-उमराव सालोदिया
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