अजमेर। 1957 में मुरेना में जन्मे उमेश ने 1974 में संत शिरोमणी विद्यासागर जी गुरू महाराज से ब्रह्ममचर्य व्रत धारण कर जीवन को धन्य करने वाले शिव मार्ग पर कदम बढ़ा दिये। फिर जो कर्म आत्म अराधना का शुरू हुआ वो पिछले 25 सालोे से अनवरत आज भी जारी है। इस अवसर पर अजमेर में 4 दिवसीय दीक्षा रजत महामहोत्सव का आयोजन सकल दिगम्बर जैन समाज के द्वारा किया जा रहा है। 4 दिवसीय कार्यक्रम में
शनिवार 20 अप्रेल को सुबह 8 बजे अखिल भारतीय दिगम्बर जैन विद्धत परिषद के उद्घाटन सत्र में प्राचार्य नरेन्द्र प्रकाश, उपाध्याय श्री के व्यक्तिव और कृतित्व पर उद्बोधन देगें साथ ही उपाध्याय श्री के आर्शिवचन सहित कई धार्मिक आयोजन होंगे।