“नारी कोई भीख नहीं”
मूल कवित्री-देवी नागरानी नारी कोई भीख नहीं न ही मर्द कोई पात्र है जिसमें उसे उठाकर उंडेला जाता है जिसे उलट-पुलट कर देखा जाता है उसके तन की खुशबू का मूल्य आँका जाता है खरीदा जाता है, इस्तेमाल किया जाता है…! तद पश्चात उसे तोड़ मरोड़ कर यूं फेंका जाता है जैसे कोई कूड़ा करकट … Read more