नई दिल्ली। केवल बचत ही नहीं बल्कि आपके कई खर्चे भी कर बचत में आपकी मदद करते हैं। बचत के विभिन्न विकल्पों को चुनते हुए अगर खर्च को भी शामिल किया जाए तो आयकर में ज्यादा छूट हासिल करते हुए अच्छा रिटर्न भी हासिल किया जा सकता है।
आयकर में बचत के उपायों को हम बेहतर तरीके से समझने के लिए दो हिस्सों में बांटते हैं। बचत और निवेश के जरिये आयकर में बचत और आवश्यक खर्च के जरिए कर में बचत।
अब थोड़ा समझा जाए कि कैसे खर्च करके भी हम कर बचा सकते हैं ।
होम लोन के ब्याज का पुनर्भुगतान:
बचत के द्वारा आयकर में बचत वाले हिस्से में हमने देखा है कि धारा 80 सी के तहत हाउसिंग लोन के मूलधन पर एक लाख रुपये तक की छूट ली जा सकती है। धारा 24 (बी) के तहत हाउसिंग लोन के ब्याज के पुनर्भुगतान पर 1,50,000 रुपये तक की कटौती मान्य है।
अपने घर की मरम्मत, पुनर्निर्माण या विस्तार के लिए अगर आपने लोन लिया है तो आप धारा 24 (सी) के तहत ब्याज में कटौती के दावेदार होंगे। इसके अंतर्गत कटौती सीमा 30,000 रुपये है। इसके तहत आप अपने घर के नवीकरण के लिए भी ऋण ले सकते हैं।
ट्यूशन फीस:
नियमित शिक्षा (दूरस्थ शिक्षा नहीं) के तौर पर दो बच्चों की ट्यूशन फीस पर धारा 80सी के अंतर्गत कर में कटौती का लाभ मिलता है। यह भी
डीटीसी का प्रभाव- कर में कटौती की सीमा घट कर 50,000 रुपये हो जाएगी और यह मेडिकल और जीवन बीमा के साथ इस राशि में शामिल होगा।
होम लोन के मूलधन का भुगतान:
धारा 80सी के तहत होम लोन के मूलधन भुगतान के तहत एक लाख रुपये तक की छूट मिलती है। इसका दावा करने के लिए आपको कर्जदाता से स्टेटमेंट लेना जरूरी होता है।
स्वास्थ्य बीमा:
अगर आप अपनी धन-संपदा को बढ़ाने की योजना बना रहे हैं तो आपके लिए मेडिकल बीमा लेना और भी जरूरी हो जाता है। मेडिकल इमरजेंसी का कोई पूर्वानुमान नहीं लगाया सकता। अगर आप खुद या अपने परिवार के मेडिक्लेम के लिए 15,000 रुपये तक का प्रीमियम देते हैं तो कर बचत का लाभ मिल सकता है। अगर आप निर्भर माता-पिता के लिए मेडिक्लेम लेते हैं तो अतिरिक्त 20,000 रुपये की छूट पा सकते हैं। वरिष्ठ नागरिक 20,000 रुपये तक की कटौती का लाभ मेडिक्लेम के जरिये पा सकते हैं।
डीटीसी का प्रभाव: डीटीसी लागू होने के बाद 50,000 रुपये के सीमा में जीवन बीमा प्रीमियम, ट्यूशन फीस के साथ मेडिक्लेम प्रीमियम भी आएगा।
धारा 24 (सी) और दूसरा घर:
अगर आप दो घरों के मालिक हैं, जिसमें से एक मकान को आपने किराए पर दे रखा है तो ऐसे में हाउसिंग लोन पर ब्याज में कटौती की कोई सीमा निर्धारित नहीं है। आपके द्वारा ब्याज के तौर पर दी जाने वाली पूरी राशि भी कटौती के दायरे में आ सकती है। याद रखें, यह आपको अपनी कुल आय में उस मकान से मिलने वाले किराए की राशि को भी जोडऩा होगा। अगर आपने अपना घर किराए पर नहीं दे रखा है, तब भी आयकर कानून के मुताबिक आपको उस मकान के लिए मिलने वाले अनुमानित किराए की राशि को अपनी आय में दर्शाना होगा।
एजुकेशन लोन का ब्याज:
धारा 80 ई के तहत आप एजुकेशन लोन पर दिए जाने वाले पूरे ब्याज पर छूट पा सकते हैं। अगर बच्चे की पढ़ाई के लिए अभिभावक या फिर मां-बाप लोन लेते हैं तो वे भी इस कटौती के हकदार होंगे। ऋण किसी मान्यता प्राप्त आर्थिक संस्था या चैरिटेबल इंस्टिट्यूट से लिया जाना चाहिए। वोकेशनल कोर्सेस समेत किसी भी किस्म की पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन बारहवीं उत्तीर्ण करने के बाद लिया जा सकता है।
घर का किराया:
अगर आपकी कंपनी आपको एचआरए या हाउसिंग फायदे नहीं देती है तो आप धारा 80जीजी के तहत इसका फायदा ले सकते हैं। यह अपना व्यवसाय करने वाले लोगों पर भी लागू होता है। धारा 80 जीजी के इन तीन नियमों के तहत आप बेहद कम कटौती के लिए ही क्लेम कर पाएंगे। जैन कहते हैं कि मकान का किराया आपकी आय के 10 प्रतिशत से अधिक हो, 2000 रुपये प्रति माह या आपकी कुल आय का 25 प्रतिशत।
(उदाहरण के तौर पर- अगर आपकी कुल आय 10 लाख रुपये है और सालाना 1 लाख रुपये से कम किराया अदा करते हों तो आप छूट के हकदार नहीं हैं। अगर आप 1,20,000 रुपये किराए के तौर पर देते हैं, तो आप 20,000 रुपये की कर छूट के दावेदार हैं। अगर आप 1,30,000 रुपये किराए के रूप में दे रहे हैं तो आपको महज 24,000 रुपये (2,000 रुपये प्रतिमाह) की छूट ही मिल पाएगी।)
अपने आश्रितों के मेडिकल खर्चे:
धारा 80 डीडीबी के तहत आप डिमेंशिया, पार्किसन डिसीज आदि जैसी बीमारियों के इलाज पर होने वाले खर्च में 40,000 रुपये की छूट पा सकते हैं। वरिष्ठ नागरिकों के इलाज के मामले में यह छूट बढ़कर 60,000 रुपये हो जाती है। अक्षमता स्तर के 40 प्रतिशत से अधिक होने पर ही कोई व्यक्ति धारा 80 डीडीबी के तहत छूट का हकदार होगा।
घातक कैंसर, एड्स, गुर्दो के काम करना बंद कर देने, थैलीसिमिया और हीमोफिलिया जैसी गंभीर बीमारियां भी इसमें कवर होती हैं। अगर आपके पास हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी है तो आप सिर्फ उतनी ही राशि में कटौती के दावेदार होंगे, जिसकी क्षतिपूर्ति आपकी बीमा कंपनी द्वारा नहीं की गई हो।
विकलांगों के लिए कटौती:
अगर कोई विकलांग व्यक्ति धारा 80यू के तहत 50,000 रुपये की कटौती के लिए क्लेम कर सकता है। गंभीर विकलांगता के मामले में यह छूट 1,00,000 रुपये तक हो जाती है। किसी विकलांग व्यक्ति के आश्रितों (पत्नी, अभिभावकों, बच्चों और भाई-बहन) पर होने वाला खर्च धारा 80 डीडी के तहत कटौती योग्य है।