नई दिल्ली। नए बैंक लाइसेंस हासिल करने के लिए अब तक 100 से ज्यादा कंपनियां अपनी रुचि जता चुकी हैं। नए बैंकिंग लाइसेंस जारी करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के दिशानिर्देशों पर स्पष्टीकरण के लिए भी बड़ी संख्या में अपीलें मिली हैं।
आरबीआइ ने इस साल फरवरी में ये दिशानिर्देश जारी किए थे। इसके तहत बैंक खोलने की इच्छुक कंपनियों को एक जुलाई, 2013 तक आवेदन जमा करने को कहा गया है। साथ ही रिजर्व बैंक ने दिशानिर्देशों पर किसी तरह का स्पष्टीकरण मांगने के लिए बैंक ने 10 अप्रैल तक का समय दिया था। यह समयसीमा पिछले सप्ताह समाप्त हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, अब तक 100 से ज्यादा कंपनियों ने बैंक लाइसेंस हासिल करने में अपनी शुरुआती रुचि जताई है। दिशानिर्देशों पर स्पष्टीकरण की मांग के लिए भेजी गई अपीलों से यह बात सामने आई है। हालांकि इनमें से केवल कुछ ही कंपनियों को बैंक लाइसेंस मिलने की उम्मीद है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आरबीआइ द्वारा चार-पांच कंपनियों को ही बैंक लाइसेंस दिए जाने की उम्मीद है। यह संख्या ज्यादा से ज्यादा आठ से 10 तक पहुंच सकती है।
देश के ज्यादातर बड़े समूहों अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले एडीए समूह, एलएंडटी, महिंद्रा, बिड़ला, रेलिगेयर और वीडियोकॉन ने सार्वजनिक रूप से लाइसेंस हासिल करने में रुचि जताई है। श्रीराम समूह, इंडियाबुल्स, इंडिया इंफोलाइन, आइएफसीआइ और पीएफसी सहित कई गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) भी इसमें रुचि जता चुकी हैं।
कई कंपनियों ने लाइसेंस हासिल करने की तैयारी के लिए देश विदेश के पूर्व बैंक प्रमुखों और अन्य सीनियर बैंकरों को सलाहकार नियुक्त किया है। खास बात यह है कि बड़ी संख्या में रीयल एस्टेट कंपनियों ने लाइसेंस के लिए आवेदन करने में रुचि दिखाई है, जबकि उनकी वित्तीय स्थिति पूरी तरह से आरबीआइ के दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं है।
आवेदन करने की समय सीमा पूरी होने पर एक जुलाई के बाद आरबीआइ रुचि जताने वाली कंपनियों के नाम सार्वजनिक करेगा। इससे पहले केंद्रीय बैंक ने करीब एक दशक पहले नए बैंक लाइसेंस जारी किए थे। बैंक दिशानिर्देशों पर स्पष्टीकरण की मांग के लिए मिली सभी अपीलों को एक-दिन में सार्वजनिक कर सकता है। वैसे, यह स्पष्टीकरण मांगने वाली कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे।