प्रथम राजा अजयपाल का स्मारक क्यों नहीं बनाया?

अजमेर के सुपरिचित बुद्धिजीवी श्री नारायण सिंह ने अजमेर के प्रथम राजा अजयपाल का स्मारक बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने सवाल किया है कि अजमेर के नेता राजा अजयपाल का स्मारक बनाना क्यों भूल गये? क्या अजमेर के नेताओं को अजमेर के प्रथम राजा अजयपाल से अनुराग नहीं है? ज्ञातव्य है कि पिछले कुछ … Read more

औंकारसिंह लखावत सिंधी हैं?

औंकारसिंह लखावत सिंधी हैं? आपको यह जानकर निश्चित ही आश्चर्य होगा कि राजस्थान पुरा धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष औंकार सिंह लखावत मूलतः सिंधी हैं। यह तथ्य किसी अन्य ने नहीं, अपितु स्वयं लखावत ने उद्घाटित किया। इतना ही नहीं उन्होंने खुद के सिंधी होने पर गर्व भी अभिव्यक्त किया। दरअसल स्वामी न्यूज के एमडी कंवलप्रकाश … Read more

ढ़ाई प्याला शराब पीती है देवी मां

ये सुनी-सुनाई बात नहीं। आंखों देखी है। काली माता की एक मूर्ति ढ़ाई प्याला शराब पीती है। यह नागौर जिले में मुख्यालय से 105 किलोमीटर दूर, रियां तहसील में, मेड़ता से जैतारण जाने वाले मार्ग पर स्थित गांव भंवाल के एक मंदिर में है। इसकी गिनती राजस्थान के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में होती है। इसकी बहुत … Read more

प्रखर साहित्यकार हैं श्री मंगलसेन सिंगला

रेलवे में राजभाषा अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त अधिकारी मंगलसेन सिंगला अंग्रेजी के साथ-साथ साहित्यिक हिंदी के विद्वान एवं समालोचक हैं। हिंदी भाषा के मूर्धन्य विद्वान हैं। हिंदी के अतिरिक्त अंग्रजी पर भी उनकी गहरी पकड है। वे कुछ समय तक दैनिक न्याय में अनुवादक के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। वे स्वभाव से … Read more

भूख भी एक यज्ञ है, समय पर आहुति दीजिए

बात तकरीबन 1990 की है। दैनिक न्याय में एक लेख प्रकाशित होने पर तत्कालीन प्रबंध संपादक स्वर्गीय श्री विश्वविभूति विदेह के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ। जैसा कि अखबार मालिकों के साथ कई बार हो जाता है। पुलिस उन्हें हिरासत में लेने को आई। शाम कोई सात बजे का समय था। हालांकि अखबार जगत के लिए … Read more

अजमेर के वजूद में है रेलवे का अहम किरदार

माना जाता है कि अजमेर का वजूद दरगाह, पुष्कर और कुछ राज्य स्तरीय दफ्तरों के साथ रेलवे की वजह से है। इनके सिवाय अजमेर कुछ भी नहीं। उसमें भी यहां की अर्थव्यवस्था का एक केन्द्र यदि रेलवे को कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। रेलवे में काम कर रहे तकरीबन दस हजार कर्मचारियों का … Read more

अजमेर को राष्ट्रीय जैन तीर्थ स्थल बनाने की मांग के मायने?

सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के दीवान हजरत जैनुल आबेदीन अली खान ने जैसे ही अजमेर को राष्ट्रीय स्तर पर जैन तीर्थ स्थल घोषित करने की मांग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से की है, एक नई बहस छिड गई है। उसके अनेक पहलु हैं। जहां तक निरपेक्ष रूप से मांग का सवाल है … Read more

बहुआयामी व्यक्तित्व हैं सुपरिचित श्रमिक नेता व पत्रकार श्री कमल गर्ग

जाने-माने श्रमिक नेता रहे श्री कमल गर्ग ने 5 फरवरी 2025 को जीवन के अस्सी वसंत पूरे कर लिए। वे बहुआयामी व्यक्ति हैं। अजमेर के प्रमुख बुद्धिजीवियों में उनकी गिनती होती है। उनका जन्म 5 फरवरी 1945 को स्वर्गीय श्री किशनस्वरूप गर्ग के घर आंगन में हुआ। प्रथम वर्ष कला इंटर ड्राइंग मुम्बई, जी डी … Read more

जैन संस्कृति का वर्चस्व रहा है प्राचीन अजमेर में

आज जब महान सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन अली खां ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिख कर अजमेर को राष्ट्रीय स्तर पर जैन तीर्थस्थल घोषित करने की मांग की है, तो यकायक अजमेर के इतिहास पर गहरी पकड रखने वाले वरिश्ठ पत्रकार श्री शिव शर्मा के … Read more

श्रीमती कमला चन्द्र गोकलानी : सिंधी साहित्य जगत में जिनकी धाक है

हिंदुस्तान के विभाजन होने के दौरान अपनी सभ्यता व संस्कृति की रक्षा के लिए जमीन-जायदाद सब कुछ का त्याग कर सिंध प्रांत से अजमेर आए परिवारों ने अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए अपने आपको स्थापित किया। इन परिवारों की कई शख्सियतों ने अपने व्यक्तित्व व कृतित्व से सिंधी समाज का नाम रोशन किया। श्रीमती … Read more

काको आडवाणी, मामो मोटवाणी

काको आडवाणी, मामो मोटवाणी। क्या यह जुमला आपने सुना है? नई पीढी को तो नहीं, मगर पुरानी पीढी के राजनीति के जानकारों को ख्याल में होगा कि यह नारा अजमेर में तब उछाला गया था, जब कांग्रेस ने सन् 1996 के लोकसभा चुनाव में एक लाख सिंधी मतदाताओं के मद्देनजर स्वर्गीय श्री किशन मोटवाणी को … Read more

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