शहर अंजान हो गया ….
कोरोना के कहर में , अपना ही शहर अंजान हो गया सुनसान हुए चौक – चौराहे बाजार वीरान हो गया , तिनके – तिनके से जहां थी दोस्ती , पहचान ही गुमनाम हो गया , लापता हो गई यारी – दोस्ती , मुल्तवी हर काम हो गया , एक अंजाने – अनचिन्हे डर के आगे … Read more