ऐसा भ्राता नही हूं मैं
स्वयं को होशियार समझता ऐसा भ्राता नहीं हूं मैं, गले मिलकर ही गला काटें ऐसी-मात्रा नहीं हूं मैं। गैरों का भी जो दर्द समझते ऐसा एक इंसान हूं मैं, क्या होता है यें प्रेम भली-भांति से समझता हूं मैं ।। दिल में अपनें दुःख समेटे उम्र भर जीता रहा हूं मैं, सब देखकर भी अनजानों … Read more