वैचारिकी – असहमति के गर्भ से गढ़ा असत्य

  *निजी रूप से मेरा सोनम वांगचुंग, किसान आंदोलन या अन्य किसी आंदोलन/राजनीति से सीधा वास्ता नहीं है, सिवाय इसके कि मैं एक भारतीय नागरिक हूँ और नागरिक हित की हर आवाज को अपने भीतर महसूस करता हूँ ।*        *नहीं जानता कि वर्तमान वांगचुंग आंदोलन का सत्य क्या है..? पूर्ववर्ती अनुभवों के खट्टे … Read more

चातुर्मास 29 जुलाई से, संयम और संस्कारों से जुड़ेगा समाज

चार माह तक एक ही स्थान पर रहकर जनजागरण करेंगे जैन साधु-साध्वी 20 जुलाई 2026 /  जैन धर्म का सर्वाधिक महत्वपूर्ण साधना काल चातुर्मास इस वर्ष 29 जुलाई से प्रारंभ होगा। वर्षा ऋतु के चार महीनों में जैन साधु-साध्वियाँ एक ही स्थान पर निवास कर आत्मसाधना, स्वाध्याय, प्रवचन, तप, त्याग एवं धर्मप्रभावना के माध्यम से … Read more

सरोजिनी नानी सलुवा को तुम पर गर्व है

कु. सरोजिनी श्रेष्ठ  ने सलुवा को गौरवान्वित किया     मैंने अभी कुछ दिन पहले ही सलुवा से संबंधित एक लेख में लिखा था कि मुझे अथवा हमें सलुवा पर गर्व है कहना भर पर्याप्त नहीं है। इसके साथ ही सलुवा को भी हम यर गर्व होना चाहिए। तभी कोई बात बनेगी। तभी ‘गौरव’ शब्द … Read more

जहाँ एल्गोरिद्म रुक जाता है, वहाँ अनुभव शुरू होता है

हाल ही में अमेरिका की प्रतिष्ठित ऑटोमोबाइल कंपनी “फोर्ड” ने AI  को अपनाकर अपने कुछ कर्मचारियों को हटा दिया था। लेकिन शीघ्र ही उसे AI की सीमाओं के चलते होने वाले नुक्सान को देखते हुए उन्हें पुनः काम पर रखना पड़ा। इसी प्रकार ग्राहक सेवा क्षेत्र की एक नामी फिनटेक कंपनी “क्लार्ना” को भी यह स्वीकार करना पड़ा कि … Read more

मंदिरों में भ्रष्टाचारः वहां सुशासन की नई क्रांति का सूत्रपात हो

भारत की पहचान केवल उसकी प्राचीन सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक दर्शन से नहीं है, बल्कि उन मंदिरों से भी है जो करोड़ों लोगों की आस्था, विश्वास और जीवन का आधार हैं। अयोध्या का श्रीराम मंदिर, बद्रीनाथ धाम, माता वैष्णोदेवी, तिरुपति, काशी विश्वनाथ, सोमनाथ, सालासर बालाजी, खाटू श्यामजी जैसे मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि … Read more

आस्था, परम्परा, आध्यात्मिक चेतना का विराट उत्सव

जगन्नाथ महायात्रा- 16 जुलाई, 2026 आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से प्रारम्भ होकर दस दिनों तक चलने वाली भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, लोकआस्था, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक दर्शन का विराट उत्सव है। पुरी की यह महायात्रा हजारों वर्षों की परम्परा का जीवंत प्रतीक है, जिसमें भगवान … Read more

एक युग का अवसान, एक विरासत का अमरत्व

राजस्थानी संस्कृति के अमर साधक के. सी. मालू कुछ व्यक्तित्व केवल अपने जीवनकाल तक सीमित नहीं रहते, वे अपने समय की सांस्कृतिक चेतना बन जाते हैं। उनके जाने के बाद भी उनकी साधना समाज की स्मृतियों, संस्कारों और परंपराओं में जीवित रहती है। राजस्थानी लोकसंगीत, भाषा, साहित्य और संस्कृति के ऐसे ही युगपुरुष थे केसरी … Read more

अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को … Read more

तुम्हारी गरीबी

तुम्हारी खाली थाली में किसी का चुनावी वादा पलता है, तुम्हारी टूटी छत के नीचे किसी का भाषण सजता है। हर बरस नए सपनों का मौसम आता है, नारे बदल जाते हैं, चेहरे बदल जाते हैं, पर तुम्हारे घर का चूल्हा वहीं का वहीं रह जाता है। तुम्हारे आँसू किसी के पोस्टर की चमक बन … Read more

दिल से तुम्हारी याद, निकलती नहीं कभी

दिल से तुम्हारी याद, निकलती नहीं कभी खुशबू तुम्हारे प्यार की, घटती नहीं कभी आकर तेरी गली से, तो बरसों गुजर गए यादों की छाँव, पलकों से, ढलती नहीं कभी खत रोज उनको लिखते हैं, होते हैं मन में खुश आदत पुरानी, हम से ये, छुटती नहीं कभी सपनों में यूँ मिलते हैं हम रोज़ … Read more

विकसित भारत की राह में जनसंख्या संतुलन का प्रश्न

विश्व जनसंख्या दिवस (11 जुलाई 2026) पर विशेषः प्रतिवर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2026 की थीम है- ‘‘युवाओं की उम्मीदों और आकांक्षाओं को साकार करना-आज और भविष्य के लिए।’’ यह विषय स्पष्ट संकेत देता है कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य केवल उसकी जनसंख्या के आकार से नहीं, बल्कि … Read more

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