विवाह संस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच नई खाई

आधुनिकता के संक्रमणकालीन दौर में सबसे अधिक यदि कोई संस्था प्रश्नों के घेरे में है, तो वह विवाह और रिश्तों की पारंपरिक अवधारणा है। बदलती जीवनशैली, आर्थिक आत्मनिर्भरता, तकनीक, वैश्वीकरण और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बढ़ती चेतना ने रिश्तों की परिभाषा, अपेक्षाएँ और संरचना-सब कुछ बदल दिया है। यही कारण है कि आज रिश्तों से जुड़े … Read more

बुजुर्गों के भरण-पोषण के लिये एक सराहनीय पहल

भारतीय संस्कृति में माता-पिता को देवतुल्य माना गया है-“मातृदेवो भव, पितृदेवो भव” केवल शास्त्रों की पंक्ति नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक संरचना की आत्मा रही है। इसलिए यह किसी भी सभ्य समाज के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है कि जन्म देने और पालन-पोषण करने वाले माता-पिता को जीवन की सांझ में उपेक्षा, अपमान और आर्थिक असुरक्षा … Read more

हिरासत में मौतें: बढ़ते आंकड़े, घटती जवाबदेही

 महज 74 दिनों में 170 मौतें—यह आंकड़ा नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर विफलता का संकेत है। हिरासत, जहां कानून के संरक्षण की उम्मीद होती है, वहीं अगर मौतें होने लगें, तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा सवाल है। इतनी बड़ी संख्या का सामने आना इस बात का संकेत है कि समस्या केवल बनी हुई नहीं है, बल्कि … Read more

अपने भीतर के हनुमान को जगाने का पर्व

हनुमान जयंती (2 अप्रैल 2026) विशेष हनुमान जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानव जीवन के चरित्र-निर्माण, आत्मबल, संयम, सेवा और समर्पण की प्रेरणा देने वाला महान दिवस है। यह दिन हमें मंदिरों में दीप जलाने से अधिक अपने भीतर के अंधकार को दूर करने का संदेश देता है। हनुमान केवल शक्ति के प्रतीक … Read more

महावीर स्वामी जी के उपदेश

आज 31 मार्च 2026 को भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव (महावीर जयंती) है इस अवसर पर- भगवान महावीर स्वामी का संदेश केवल जैन धर्म के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए कल्याणकारी है। उनके दर्शन का मूल आधार “आत्मवत् सर्वभूतेषु” (सभी जीवों को अपने समान समझना) है। उनके मुख्य संदेश इस प्रकार … Read more

माओवादी मुक्ति से शांति एवं संतुलन की नई संभावनाएं

भारत जैसे विशाल, विविधतापूर्ण और लोकतांत्रिक राष्ट्र के सामने आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियां हमेशा से बहुआयामी रही हैं। इन चुनौतियों में नक्सलवाद या माओवादी हिंसा एक ऐसी समस्या रही, जिसने दशकों तक देश की आंतरिक शांति, विकास और सुशासन को गंभीर रूप से प्रभावित किया। विशेषकर छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, बिहार और आंध्र प्रदेश के आदिवासी … Read more

एकात्म मानववाद: पुनर्जागरण का भारतीय मंत्र

वैश्विक इतिहास में एक समय ऐसा आता है, जब प्रगति का शिखर भी शून्यता का अहसास कराने लगता है; जब उपलब्धियाँ भी असंतोष को जन्म देती हैं; और जब विकास का वैभव अन्दर की दरिद्रता को छिपा नहीं पाता। आज का वैश्विक परिदृश्य कुछ ऐसा ही है—बाह्य समृद्धि और आंतरिक विखंडन का एक बेमेल संगम। … Read more

युद्ध के माहौल में महावीर के दर्शन की उपादेयता

सदियों पहले महावीर जनमे। वे जन्म से महावीर नहीं थे। उन्होंने जीवन भर अनगिनत संघर्षों को झेला, कष्टों को सहा, दुख में से सुख खोजा और गहन तप एवं साधना के बल पर सत्य तक पहुंचे, इसलिये वे हमारे लिए आदर्शों की ऊंची मीनार बन गये। उन्होंने समझ दी कि महानता कभी भौतिक पदार्थों, सुख-सुविधाओं, … Read more

युद्धग्रस्त विश्व में महावीर की अहिंसा: शांति की एकमात्र राह

संदर्भ – तीर्थंकर महावीर स्वामी जन्म कल्याणक 2625वां (31 मार्च 2026) आज का विश्व एक विचित्र विरोधाभास से गुजर रहा है। एक ओर विज्ञान, तकनीक और वैश्वीकरण ने मानव जीवन को अभूतपूर्व सुविधाएं दी हैं, वहीं दूसरी ओर युद्ध, हिंसा और असहिष्णुता ने मानवता के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। विश्व के … Read more

बीमा सुरक्षा का माध्यम बने, न कि मुनाफे का जाल

बीमा का मूल उद्देश्य जीवन की अनिश्चितताओं से सुरक्षा प्रदान करना है। यह व्यवस्था व्यक्ति को बीमारी, दुर्घटना या अन्य संकटों के समय आर्थिक सहारा देती है। परंतु आज के दौर में यह व्यवस्था अपने मूल उद्देश्य से भटकती हुई दिखाई दे रही है। विशेषकर स्वास्थ्य बीमा के क्षेत्र में जो जटिलताएं, अपारदर्शिता और मनमानी … Read more

मर्यादा, सुशासन और शांति के विश्वनायक श्रीराम

रामनवमी- 26 मार्च, 2026 रामनवमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के नैतिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का पुण्य और पवित्र अवसर है। आज जब दुनिया युद्ध, हिंसा, आतंक, असहिष्णुता, पारिवारिक विघटन, राजनीतिक अविश्वास और नैतिक पतन जैसी अनेक समस्याओं से जूझ रही है, तब मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन-दर्शन केवल आस्था का विषय … Read more

error: Content is protected !!