माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी,
नमस्कार।

मैं कोसीनोक जैन, अजमेर का निवासी, आपसे एक गंभीर विषय पर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं।
जानकारी के अनुसार, देश की संसद में वर्ष 2003 से कोल्ड ड्रिंक्स की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया था। इसका उद्देश्य सांसदों और मंत्रियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा तथा इन पेयों में हानिकारक तत्वों को लेकर उठी चिंताओं को ध्यान में रखना था।
यदि संसद के अंदर जनप्रतिनिधियों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए यह निर्णय उचित था, तो यही चिंता देश की आम जनता के लिए क्यों नहीं दिखाई देती?
आज कोल्ड ड्रिंक्स देश के हर शहर, कस्बे और गांव में खुलेआम बिक रही हैं। यहां तक कि स्कूलों और कॉलेजों की कैंटीनों में भी इनकी उपलब्धता आम बात है। यदि ये पेय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, तो फिर आम नागरिकों को इनके प्रभाव से बचाने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जाते?
कोल्ड ड्रिंक्स से जुड़े प्रमुख स्वास्थ्य जोखिम:
* अत्यधिक चीनी के कारण मोटापा और मधुमेह का खतरा बढ़ता है।
* फॉस्फोरिक एसिड हड्डियों को कमजोर कर सकता है।
* दांतों के इनेमल को नुकसान पहुंचता है और कैविटी बढ़ती है।
* लिवर और किडनी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
* शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) की समस्या हो सकती है।
मेरा प्रश्न केवल इतना है कि यदि सांसदों और मंत्रियों के स्वास्थ्य की चिंता की जा सकती है, तो देश के करोड़ों नागरिकों के स्वास्थ्य की चिंता भी उतनी ही गंभीरता से क्यों नहीं की जानी चाहिए?
यदि प्रतिबंध आवश्यक नहीं है, तो संसद में भी यह प्रतिबंध नहीं होना चाहिए। और यदि यह स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए आवश्यक है, तो आम जनता, विशेषकर बच्चों और युवाओं के हित में भी प्रभावी नीतियां बनाई जानी चाहिए।
आशा है कि आप इस विषय पर गंभीरता से विचार करेंगे और देशवासियों के स्वास्थ्य हित में उचित कदम उठाएंगे।
सादर,
कोसीनोक जैन
अजमेर, राजस्थान