पिंगल से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक

आज मानवता कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में प्रवेश कर चुकी है। मशीनें भाषा समझ रही हैं, चित्र बना रही हैं, निर्णय ले रही हैं और अनेक क्षेत्रों में मनुष्य की क्षमताओं को चुनौती देती दिखाई दे रही हैं। विश्व के अधिकांश देशों में एआई को तकनीकी क्रांति के रूप में देखा जा रहा है। किंतु भारत के … Read more

स्वस्थ जीवन एवं स्वस्थ पर्यावरण का आधार है साइकिल

विश्व साइकिल दिवस, 3 जून 2026 पर विशेषः हर वर्ष 3 जून को मनाया जाने वाला विश्व साइकिल दिवस केवल एक साधारण वाहन के सम्मान का अवसर नहीं है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समानता और सतत विकास के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, बढ़ती … Read more

क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता कोरा बुलबुला है या वास्तविक चुनौती?

मानव सभ्यता के इतिहास में कुछ ऐसी क्रांतियां हुई हैं जिन्होंने जीवन की दिशा और दशा दोनों को बदल दिया। कृषि क्रांति ने मनुष्य को स्थायित्व दिया, औद्योगिक क्रांति ने उत्पादन और श्रम की परिभाषा बदली, सूचना क्रांति ने ज्ञान और संचार की सीमाएं समाप्त कर दीं। अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई की क्रांति मानव … Read more

देश-प्रदेश की सवैधानिक सामाजिक महत्वपूर्ण कड़ी अधिवक्ता समुदाय है

राजनीतिक आर्थिक सामाजिक रूप से अधिवक्ताओं की देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका भी रहती रही है। पिछले कुछ वर्षों से कांग्रेस संगठन में कांग्रेस समर्थित अधिवक्ताओं से कांग्रेस के आला कमान की दूरी देखने को मिली है, जबकि समाज से जन समुदाय से सीधा संपर्क रखने वाला सबसे बड़ा समुदाय अधिवक्ता परिवार है, भाजपा … Read more

माता-पिता हैं वर्तमान की शक्ति और भविष्य की प्रेरणा

विश्व माता-पिता दिवस- 1 जून, 2026 विश्व के अधिकतर देशों की संस्कृति में माता-पिता का रिश्ता सबसे बड़ा एवं प्रगाढ़ माना गया है। भारत में तो इन्हें ईश्वर का रूप माना गया है। माता-पिता को उनके बच्चों के लिए किए गए उनके काम, बच्चों के प्रति उनकी निस्वार्थ प्रतिबद्धता और इस रिश्ते को पोषित करने … Read more

त्रिभाषा फार्मूला है भारत की शिक्षा का नया क्षितिज

भारत केवल एक राष्ट्र नहीं, बल्कि भाषाओं, बोलियों, संस्कृतियों और परंपराओं का विराट संगम है। यहां भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान, संस्कृति, संवेदना और सामाजिक चेतना का आधार भी है। ऐसे बहुभाषी देश में शिक्षा व्यवस्था को किस भाषा में संचालित किया जाए और बच्चों को कौन-कौन सी भाषाएं पढ़ाई जाएं, यह … Read more

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष : जनचेतना से लोकतंत्र तक

–बाबूलाल नागा 30 मई 1826 को जब पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने कोलकाता से हिंदी के पहले समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड का प्रकाशन शुरू किया, तब शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि यह छोटा-सा प्रयास आने वाले समय में करोड़ों लोगों की आवाज बन जाएगा। वर्ष 2026 हिंदी पत्रकारिता के लिए ऐतिहासिक पड़ाव है, क्योंकि यह केवल 200 वर्षों का उत्सव नहीं, बल्कि लोकतंत्र, जनसंघर्ष … Read more

बकरा ईद इसका महत्व क्या है

बकरा ईद (ईद-उल-अजहा) इस्लाम धर्म को मानने वालो का प्रमुख पर्व है जो त्याग, समर्पण और अल्लाह के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है । यह पर्व पैगंबर इब्राहिम द्वारा अपने पुत्र हज़रत इस्माइल की अल्लाह की राह में दी जाने वाली सर्वोच्च कुर्बानी की याद में मनाया जाता है ।बकरा ईद से जुड़ी बातें … Read more

चोर चुप ही रहता तो कम पिटता..

चोर चुप ही रहता तो कम पिटता..यह लतीफा इस समय उन लोगों के लिए बड़ा मौजू बैठता है तो इन दिनों की महंगाई और आर्थिक बदहाली का अजब-गजब तर्कों से बचाव कर रहे हैं और अपना बिना बात मखौल उड़वा रहे हैं। बहुत संभव है उन्हें मंहगाई से होने वाली दुर्गति का अहसास ना हो। … Read more

क्या आम आदमी विकास से बाहर छूट रहा है?

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद नए भारत के निर्माण के जिन आधार स्तंभों की कल्पना की गई थी, उनमें शिक्षा और चिकित्सा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई थी। यह माना गया था कि यदि देश के नागरिक शिक्षित, स्वस्थ और जागरूक होंगे तो लोकतंत्र मजबूत होगा, सामाजिक असमानताएं कम होंगी और राष्ट्र विकास के पथ पर … Read more

क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक शैली को लेकर बहस तेज

भाजयुमो की नई प्रदेश कार्यकारिणी पर उठे सवाल जयपुर। राजस्थान भाजपा युवा मोर्चा की नई 63 सदस्यीय प्रदेश कार्यकारिणी घोषित होते ही संगठन और राजनीतिक हलकों में क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और कार्यकर्ता उपेक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। प्रदेशाध्यक्ष शंकर गोरा द्वारा घोषित इस टीम में प्रदेश उपाध्यक्ष, महामंत्री, मंत्री, मीडिया, आईटी … Read more

error: Content is protected !!