मेवाड़ का सूर्य पुत्र जिसने कभी अधीनता स्वीकार नहीं की

प्रातः स्मरणीय वीरशिरोमणि महाराणा प्रताप की जयन्ती पर विशेष – महाराणा प्रताप का नाम लेते ही हमारे सामने स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानी राष्ट्र्वीर की भव्य मूर्ति आ जाती है। प्रातः स्मरणीय प्रणवीर प्रताप ने अपनी कष्ट सहिष्णुता, त्याग, संगठन शक्ति, प्रतिज्ञा पालन, देश प्रेम, कुशल नेतृत्व और अपार वीरता से इतिहास में एक उज्जवल, अनुकरणीय आदर्श की स्थापना की है, जिससे … Read more

शिक्षा में एक नये युग एवं शैक्षिक क्रांति की आहट

आज पूरी दुनिया शिक्षा के एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां ज्ञान का विस्तार तो अभूतपूर्व हुआ है, लेकिन जीवन मूल्यों का क्षरण भी उतनी ही तेजी से दिखाई देता है। विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन को सुविधासंपन्न बनाया है, लेकिन मानसिक तनाव, हिंसा, प्रतिस्पर्धा, नैतिक संकट और मानवीय संवेदनाओं के क्षय जैसी … Read more

राम लौटे हैं अयोध्या में

राम लौटे हैं अयोध्या में, फिर दीपों का मेला है, सदियों की सूनी पलकों पर, सपनों का उजियाला है। राम लौटे हैं अयोध्या में…  सरयू गाए मंगल-गाथा, नभ जय-जयकारें करता है, हर पत्थर में राम-नाम का, अक्षय स्वर झरता है। तप की अग्नि, त्यागों की बेला, श्रद्धा का अभिनंदन है, यह केवल मंदिर नहीं, राष्ट्र-आत्मा का वंदन है। हर आहट में आज सुनाई, मर्यादा का रेला है, सदियों की सूनी पलकों पर, सपनों का उजियाला है। राम लौटे हैं अयोध्या में… राम न केवल राजतिलक हैं, जन-जन की अभिलाषा हैं, शबरी की आँखों की प्रतीक्षा, केवट की परिभाषा हैं। वन की पगडंडी पर चलकर, मानवता को मान दिया, टूटे मन के हर कोने को, अपनेपन का दान दिया। आज अयोध्या के कण-कण में, युग का नव-उद्घोष … Read more

गृहिणी राष्ट्रनिर्माता है तो हिंसा की शिकार क्यों?

भारतीय समाज में महिलाओं को सशक्त बनाने के दावे लंबे समय से किए जाते रहे हैं। उन्हें ‘आधी आबादी’ और विकास की समान भागीदार कहा जाता है। शिक्षा, रोजगार, राजनीति और नेतृत्व के क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएं बनाई जाती हैं। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने … Read more

बचपन को श्रम नहीं, शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान का अधिकार मिलें

बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस-12 जून 2026 हर वर्ष 12 जून को मनाया जाने वाला बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस केवल एक औपचारिक दिवस नहीं, बल्कि मानवता के अंतःकरण को झकझोरने वाला अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि दुनिया का कोई भी बच्चा मजदूर बनने के लिए पैदा नहीं होता। … Read more

मासूम बचपन पर मजदूरी का बोझ: क्या बच्चों के संवैधानिक अधिकार सुरक्षित हैं?

12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस -बाबूलाल नागा    जब किसी होटल में चाय परोसता, किसी ढाबे पर बर्तन साफ करता या ईंट-भट्टे पर काम करता बच्चा दिखाई देता है, तब केवल एक बच्चा मजदूरी नहीं कर रहा होता, बल्कि संविधान की आत्मा भी कहीं न कहीं घायल होती है। बच्चों के हाथों में किताबों और खिलौनों … Read more

राजस्थान से राज्यसभा में अनुभव, सादगी और समर्पण की नई तिकड़ी

 –    राकेश दुबे राजस्थान की राजनीति में राज्यसभा चुनाव प्रायः राजनीतिक गणित, रणनीति और शक्ति प्रदर्शन के लिए चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार का चुनाव एक अलग ही संदेश देकर गया। प्रदेश से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नीरज डांगी तथा भारतीय जनता पार्टी के डॉ. सतीश पूनिया और डॉ. अलका सिंह गुर्जर का निर्विरोध निर्वाचन केवल … Read more

अपने अपने कुरुक्षेत्र में

*आवाजों का छायादार चेहरा*  *रात घर से निकलते हुए डर लगता है*  *चांद दीवार पर रखा कटा सर लगता है*     *अब्बास ताबिश का यह शे’ र हर उस समय के लिए माैजू बैठता है जब अंधेरे समूह चांद की चांदनी को डसने लगते हैं ।*  *मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा जाने के रस्ते को बाधित … Read more

राज्यसभा में निर्विरोध चयन से निखरी नीरज डांगी की राजनीतिक प्रतिष्ठा

अपने पिता की तरह नीरज भी आलाकमान के करीबी, दिनेश राय डांगी का भी  था जनता से गहरा लगाव  -विशेष संवाददाता- जयपुर। राजस्थान से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद नीरज डांगी सहित बीजेपी के डॉ सतीश पूनिया और डॉ अलका गुर्जर का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है। लेकिन दूसरी बार राज्यसभा में जा रहे नीरज डांगी … Read more

हम तो डूबेंगे, तुम्हें भी ले डूबेंगे

खुद की उपेक्षा और पायलट को आगे बढ़ते देखना गहलोत को बर्दाश्त नहीं, शीर्ष पर रहे राजनीतिक क्षत्रप उतार आने पर बौखला जाते हैं *ओम माथुर*       जब किसी राज्य में कोई राजनीतिक क्षत्रप लगातार शीर्ष पर रहता है, तो उसे ये बर्दाश्त नहीं होता है कि कोई उसे वहां से हटा दें। … Read more

*तृणमूल की बिखरी पत्तियां*

*फूलों का बिखरना तो तय था लेकिन*  *कुछ इसमें हवाओ की सियासत बहुत थी*  *ममता बनर्जी की तृणमूल या फूल की पत्तियां के बिखरने पर परवीन शाकिर का उक्त शे’र  कुछ इस तरह मानस में कौंधता है गोया शायरा ने इसी मौके के लिए यह कहा हो।*        *ममता के साथ जो क्या … Read more

error: Content is protected !!