चुनावी घोषणा पत्र के साथ गारंटी और वारंटी… ओह… ओह…!
-मोहन थानवी- अचानक सामने जो देखा, यकीन नहीं हुआ। तसव्वुर में जरूर ऐसे नजारे किए लेकिन सामने… यथार्थ में… आश्चर्य ! कैसे तो ख्वाब आया ओर कैसे ख्वाब में ये नजारा आया फिर कैसे सामने हकीकत में देख कर आंखें चुंधिया रही हैं…! स्वप्न…! जरूर स्वप्न ही है ! बांह पर चिकोटी काटी… उई…! जागते का … Read more