“जहनुमु” (नंंढी कहाणी)

लेखिका : देवी नागरानी अनुवाद : पदमा गोविंद मोटवानी सोटी साढ़ीअ जे पलांद सां पघर में पुसियल मुंहुं उघंदी माला जड॒हिं डा॒कणि चढ़ी चालि में पंहिंजे घर साम्हूं बीही करे कुंडे ते लग॒लि तालो खोलण जी कोशिश करण लगी॒ त उते बीठलि पाड़े वारीअ पुछी वरितसि -“माला सुबुह सुबुह जो किथां पेई अचीं ?” “जहनुमु” … Read more

वक़्त जी सहूलियत (नंंढी कहाणी)

लेखिका : देवी नागरानी अनुवाद : पदमा गोविंद मोटवानी जहिड़ी तरह बाग़नि में जुदा जुदा रंगनि जा गुल हूंदा आहिनि, तहिड़ी तरह ई समाज में किसिम-किसिम जा माण्हूं हूंदा आहिनि। अहिड़ा माण्हूं पंहिंजी फ़ितिरत ऐं वक़्त जी सहूलियत सां पंहिंजा कम पूरा कंदा आहिनि- कड॒हिं चहकंदे, कड॒हिं महकंदे ऐं कड॒हिं महकाईंदे। अहिड़ो ई हिकु संजोगु॒ … Read more

मक़्सदु ऐं हुक़ुमु (नंढी कहाणी)

लेखिका : देवी नागरानी अनुवाद : पदमा गोविंद मोटवानी पीउ जे मौत जी ख़बर ते पुटु परदेस मां भारत आयो। पीउ जो अग्नि संस्कार ऐं सभु क्रियाक्रम विधि विधान सां कयाईं। पंद्रहनि डीं॒हंनि खां पोइ परदेसु वापसि वञण वक़्तु हुन माउ खे पेरे पवंदे चयो हू पीउ जी पुण्य तिथिअ लाइ साल खां पोइ मोटंदो … Read more

जादुई संसार रचने वाली पुस्तकें सच्ची मित्र होती है

राष्ट्रीय पुस्तक प्रेमी दिवस- 9 अगस्त, 2024 इंसान की ज़िंदगी विचारों का सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान है। वैचारिक क्रांति एवं विचारों की जंग में पुस्तकें सबसे बड़ा हथियार है। जिसके लिए न तो कोई लाइसेंस लेना है, न ही इसके लिए किसी नियम-क़ायदे से गुज़रना है, लेकिन यह हथियार जिसके पास हैं, वह ज़िंदगी की जंग … Read more

कामयाबी (नंढी कहाणी)

लेखिका : देवी नागरानी अनुवाद : पदमा गोविंद मोटवानी “अमां अजु॒ मुंहिंजे इम्तिहान जो नतीजो आयो आहे” बा॒र घरु अची जोश सां माउ खे जा॒णायो। माउ खुशु थींदे पुछियो-“कहिड़ो नंबरु आयो आहीं?” “पंजो” “तुंहिंजे दर्जे में केतिरा बा॒र आहिनि?” “सिर्फ़ पंज” बा॒र मासूमियत सां चयो। [email protected]

जहिड़े सां तहिड़ो (नंंढी कहाणी)

लेखिका : देवी नागरानी अनुवाद : पदमा गोविंद मोटवानी हिक साहिड़ीअ बी॒ साहिड़ीअ खे हिक सूखिरीअ जे रूप में सुहिणी सींगारुदानी डि॒नी। जाचण खां पोइ हुन खे लगो॒ त उन में जेको सामानु आहे, उहो नकली आहे। हुन खे घणो गुस्सो आयो, पर हूअ उन खे गी॒ही बि कोन सघी ऐं कढी फिटो बि कोन … Read more

पडोसी देशों में भारत-विरोधी सरकारों के गठन की चिन्ता

भारत के पडोसी देशों में अस्थिरता एवं अराजकता का माहौल चिन्ताजनक है। बांग्लादेश के साथ-साथ भारत के पड़ोसी मुल्कों में हुए हालिया अराजक, हिंसक एवं अस्थिरता के घटनाक्रमों से एक तस्वीर बनती है एवं एक सन्देश उभर कर आता है, वह है, चीनी के द्वारा भारत विरोधी सरकारों के गठन की साजिश। सिर्फ बांग्लादेश ही … Read more

तरकीअ जी वाट ते हिकु बि॒यो विश्वेश्वरैया (नंंढी कहाणी)

लेखिका : देवी नागरानी अनुवाद : पदमा गोविंद मोटवानी सावित्रीअ जो घोटु घणो महनती ऐं होशियार शख्सियत जो धनी रहियो, पंहिंजी ईमानदारीअ सां आख़िर तरक़ीअ जी चोट ते अची पहुतो हुओ। इहो ज़ाहिरि तड॒हिं थियो जड॒हिं हुन खे हरियाणा जी यूनिवर्सिटीअ में सभिनी खां वडे॒ ओहदे ते मुकररि कयो वियो। एतिरे मान वारे ओहदे खे … Read more

हक़ु (नंंढी कहाणी)

लेखिका : देवी नागरानी अनुवाद : पदमा गोविंद मोटवानी अखियूं गुस्से सां गा॒ढ़ियूं थी वेयूं हुअसि, मुंहं मां बाहि जो बंबटु निकिरण लाइ तरिफ़ी रहियो हुअसि। मंदर जो पुजा॒री भगु॒वान खां पुठि वराए ईअं बीठो रहियो जीअं त हू मुंहुं डे॒खारण जे क़ाबिल ई न रहियो हुजे। ईअं लगो॒ जीअं को अणथियणो वाक़िओ थियो हुजे। … Read more

निरंकुशता के कारण हसीना का ऩिष्कासन

बांग्लादेश में जनभावना को दबाने एवं अनसूना करने से पनपे विद्रोह, आक्रोश एवं विरोध की निष्पत्ति है शेख हसीना सरकार का पतन। लम्बे समय से चला आ रहा आरक्षण विरोधी आंदोलन का आक्रोश उग्रतम होता गया, मगर इस आक्रोश की बुनियाद सात माह पूर्व हुए चुनाव में अनियमितताओं के बाद ही पड़ गई थी। हाल … Read more

न्याय से आशा एवं अहसास जगाते चन्द्रचूड़

50वें प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) डी.वाई. चंद्रचूड़ की न्याय प्रणाली विसंगतियों एवं विषमताओं से जुड़ी इस स्वीकारोक्ति ने हर संवेदनशील भारतीय के मन को छुआ कि अदालतों में लंबे समय से लंबित मामलों से तंग आकर लोग बस समझौता करना चाहते हैं। ‘न्याय में देरी न्याय के सिद्धांत से विमुखता है’ वाली इस बात को सभी … Read more

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