बात कड़वी है
बात कड़वी है। लेकिन आज फिर इसका अनुभव हुआ। राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का निधन हो गया। इस मिसाइलमैन को श्रृद्धांजलि। लेकिन जब अपने अखबार के दफ्तर में बैठा,तो जो भी फोन आया,उसमें सामने वाले ने यही पूछा कि क्या कल दफ्तरों में छुट्टी है? क्या स्कूलें खुलेंगी? क्या हो गया हमारी संवेदनशीलता को? देश … Read more