स्वादिष्ट भोजन में कंकड़ की तरह है कर्नाटक का हिंदी विरोध ….!!

तारकेश कुमार ओझा छात्र जीवन में अनायास ही एक बार दक्षिण भारत की यात्रा का संयोग बन गया। तब तामिलनाडु में हिंदी विरोध की बड़ी चर्चा होती थी। हमारी यात्रा ओड़िशा के रास्ते आंध्र प्रदेश से शुरू हुई और तामिलनाडु तक जारी रही। इस बीच केरल का एक हल्का चक्कर भी लग गया। केरल की … Read more

बिना हिंदी के हिन्दुस्तान की कल्पना नहीं की जा सकती

(14 सितंबर 2017 हिंदी दिवस पर विशेष Article) हिंदी शब्द है हमारी आवाज का हमारे बोलने का जो कि हिन्दुस्तान में बोली जाती है। आज देश में जितनी भी क्षेत्रीय भाषाएँ हैं उन सबकी जननी हिंदी है। और हिंदी को जन्म देने वाली भाषा का नाम संस्कृत है। जो कि आज देश में सिर्फ प्रतीकात्मक … Read more

गुरु के राशि परिवर्तन का प्रभाव 12 सितम्बर 2017

[कृपया ध्यान देंः ये भविष्यवाणियां चंद्र राशि को ध्यान में रखकर की गई हैं। लेकिन, इसका कुछ प्रभाव लग्न राशि वालों पर भी लागू होंगे] प्रिय पाठकों/मित्रों, वैदिक ज्योतिष के अनुसार देवगुरु बृहस्पति की हर गतिविधि खास मायने रखती है और जिस भाव में बृहस्पति का परिवर्तन होता है उसके अनुसार समस्त राशियों पर इसका … Read more

ग्रहों के प्रभाव का प्रमाण

अतिथि पोस्ट — श्री विद्या सागर महथा , गत्यात्मक ज्योतिष के जनक अक्सरहा लोग सूर्य-चंद्र के द्वारा पृथ्वी के जड़-चेतन पर पड़नेवाले प्रभाव को स्वीकार करते हैं I सूर्य के कारण ही सारी सृष्टि संभव है I लेकिन बाकी ग्रहों के पड़नेवाले प्रभाव को ज्योतिषीय ज्ञान के अभाव में लोग कबूल नहीं कर पाते हैं … Read more

Vaishy Maharaja Agresen—–Staunch Believer in SOCIALISM and NON-VIOLENCE Part 1

Economic, Cultural, Political and Social development on sound footing are essential fo building a Developed and Prosperous State. Raja Agresen was first person who had established and developed social Welfare state as early as more than 5200 years ago. Beside a Karmyogee, Maharaja Agresen introduced concept of Socialism, Non Violence (Ahinsa).He ws born on Ashivin … Read more

अणुव्रत के आदर्शों का हो नया भारत

सत्तर वर्ष पूर्व भारत की स्वतंत्रता के बुनियादी पत्थर पर नव-निर्माण का सुनहला भविष्य लिखा गया था। इस लिखावट का हार्द था कि हमारा भारत एक ऐसा राष्ट्र होगा जहां न शोषक होगा, न कोई शोषित, न मालिक होगा, न कोई मजदूर, न अमीर होगा, न कोई गरीब। सबके लिए शिक्षा, रोजगार, चिकित्सा और उन्नति … Read more

जीवन को आनन्दमय बनाये रखने का मन्त्र—-सामना करे कड़वी सच्चाइयों का Part 2

जो आप सोचते उसे क्रियान्वित करना बहुत ही जरूरी है क्योंकि सोचना और उसे मूर्तरूप देना बिल्कुल अलग होती हैं। सुखी जीवन के लिये योजनायें बनाना सही हो सकता है किन्तु इन योजनाओं को वास्तविकताओं में बदलने के लिए कड़ी मेहनत, लगन और सकारात्मक सोच रखना भी लाजमी होता है | थोथा चना बाजे घना … Read more

जीवन को आनन्दमय बनाये रखने का मन्त्र—-सामना करे कड़वी सच्चाइयों का Part 1

वास्तविकता तो यही है कि हम स्वयं ही हमारी जिन्दगी को अशांत, दुखी, शंखालु एवम् अस्त-व्यस्त बना डालने का कारण खुद ही होते हैं | जी हाँ, क्योंकि हम अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या या जिन्दगी में कुछ कड़वी सच्चाईयों से मुहं मोड़ कर उनकी जानबुझ कर अनदेखी कर देते अथवा उन्हें नकार देते हैं | … Read more

शिक्षक समाज की धुरी व देश निर्माता

– देवेन्द्रराज सुथार समाज की नवचेतना को आकार एवं दिशा देने में शिक्षक की अहम् भूमिका होती है। शिक्षक समाज का दर्पण व निर्माण वाहक है। नवशिशु नामक नवकोपले जब इस संसार जगत में प्रवेश करती है, तो उस समय वह परिवार की पाठशाला में मां नामक शिक्षक से संस्कारों व व्यवहार की तालीम ग्रहण … Read more

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