नवरात्रों के महत्व का वैज्ञानिक आधार

पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा करते समय एक साल में चार संधियां होती हैं जिनमें से मार्च व सितंबर माह में पड़ने वाली गोल संधियों में साल के दो मुख्य नवरात्र उत्सव आते हैं । ध्यान रखिये कि इसी समय हमारे शरीर पर रोगाणुओं के आक्रमण की प्रबल संभावना होती है । ऋतु संधियों में … Read more

त्योहार और बाजार…!

तारकेश कुमार ओझा कहते हैं बाजार में वो ताकत हैं जिसकी दूरदर्शी आंखे हर अवसर को भुना कर मोटा मुनाफा कमाने में सक्षम हैं। महंगे प्राइवेट स्कूल, क्रिकेट , शीतल पेयजल व मॉल से लेकर फ्लैट संस्कृति तक इसी बाजार की उपज है। बाजार ने इनकी उपयोगिता व संभावनाओं को बहुत पहले पहचान लिया और … Read more

देवी शक्ति की आराधना का पर्व—-नवरात्रा

पहला नवरात्रा बालिकाओं को, दूसरा नवरात्रा युवतियों तथा तीसरा नवरात्रा महिलाओं के चरणों में समर्पित है | देवी अम्बा उर्जा (प्राक्रतिक शक्तियों) की प्रतीक है | नवरात्री के चोथे, पांचवें एवं छठे दिन माता लक्ष्मी यानि सुख-सम्पन्नता,शांति एवं वैभव के दिन है | जीवन में धन-दोलत एक सीमा तक आवश्यक और महत्वपूर्ण होती है किन्तु … Read more

आईये देखें क्यों हमारे अधिकतर धार्मिक पर्व रात में ही मनाये जाते हैं ?

क्या हमने इस सच्चाई पर ध्यान दिया है कि क्यों प्रमुख धार्मिक पर्व यथा दीपावली, होली, शिवरात्रि, नवरात्रा आदि हमारे देश में रात में ही मनाये जाते है ? मन में सवाल उठता है कि हम शिवरात्री या नवरात्री को शिवदिन या नवदिन क्यों नहीं कहते हैं? इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि अगर रात्रि … Read more

क्‍या भगवान श्रीराम ने की थी नवरात्रि की शुरूआत ?

नवरात्रि का पर्व विनाशकारी ,तामसी ,अनिष्टकारी, अधार्मिक एवं अमानवीय प्रव्रत्तियों पर सात्विकता, कल्याणकारी प्रव्रत्तियों, मानवीयता, धर्म एवं सत्य की विजय का पर्व है | नवरात्रा का पर् साल में दो बार यानि चैत्र और आश्विन माह में मनाया जाता है, हालाँकि चैत्र माह में मनाई जाने वाली नवरात्रि को प्रमुख माना जाता है। सर्वप्रथम दुर्गा … Read more

शक्ति की उपासना और कन्याओं पर बढ़ते जुल्म

शताब्दियों से हम साल में दो बार नवरात्र महोत्सव मनाते हुए कन्याओं को पूजते हैं। पूरे नौ दिन शक्ति की उपासना होती है। दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा-अर्चना करके लोग उनसे अपने घर पधारने का अनुरोध करते हैं। लेकिन विडम्बना देखिये कि सदियों की पूजा के बाद भी हमने कन्याओं को उनका उचित स्थान … Read more

समाजवाद के प्रणेता एवं प्रथम वैश्य सम्राट कर्मयोगी महाराजा अग्रसेन Part 4

पशुबलि बंद करवाने वाले प्रथम सम्राट कुलदेवी माता लक्ष्मी की कृपा से भगवान अग्रसेन के 18 पुत्र हुये। राजकुमार विभु उनमें सबसे बड़े थे। महर्षि गर्ग ने भगवान अग्रसेन को 18 पुत्रके साथ 18 यज्ञ करने का संकल्प करवाया। उन दिनो यज्ञों में पशुबलि दी जाती थी। जिस समय 18 वें यज्ञ में जीवित पशुओं … Read more

समाजवाद के प्रणेता एवं प्रथम वैश्य सम्राट कर्मयोगी महाराजा अग्रसेन Part 3

अग्रोहा शहर का जन्म——देवी महालक्ष्मी से आशीर्वाद प्राप्त करने के बादराजा अग्रसेन ने नए राज्य की स्थापना एवं राजधानी के चयन हेतु रानी माधवी के साथ भारत का भ्रमण किया, अपनी यात्रा के दौरान वे एक जगह रुके जहाँ उन्होंनेदेखा कि कुछ शेर और भेडीये के बच्चे साथ-साथ खेल रहे थे | राजा अग्रसेन ने … Read more

समाजवाद के प्रणेता एवं प्रथम वैश्य सम्राट कर्मयोगी महाराजा अग्रसेन Part 2

भगवान् शिव और माता लक्ष्मी की आराधना— यहाँ यह स्मरण रखने वाली बात है कि महाभारत के युद्ध के कारण जन-धन की भारी तबाही हुई थी, इसलिये राष्ट्र के पुनर्निर्माण हेतु शांति के साथ उद्ध्योग, खेती,व्यापर की आवश्यकता थी जो वैश्यों दुवारा ही सम्भव था | महाराज अग्रसेन ने काशी जाकर भगवान शिव की कठोर … Read more

समाजवाद के प्रणेता एवं प्रथम वैश्य सम्राट कर्मयोगी महाराजा अग्रसेन Part 1

किसी भी राष्ट्र और समाज उन्नत तथा विकसित बनाने के लिये उसके आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक स्तम्भ मजबूत होने चाहिये | इन चारों स्तंभों को दृढ़ करके ही राष्ट्र को प्रगतिशील एवं विकसित देश बनाया जा सकता है | आज से लगभग 5141 साल पहिले महाराजा अग्रसेनजी ने इन्हीं चार स्तंभों को मजबूत कर … Read more

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