भाजपा शहर इकाई चेती, मगर जरा देर से

देर से मगर बोले तो सही शहर भाजपा अध्यक्ष प्रो रासासिंह रावत

पिछले पांच दिन से शहर की यातायात पुलिस कुछ ज्यादा ही मुस्तैद है। मुस्तैदी भी ऐसी कि वाहन चालकों के साथ बदतमीजी पर उतर आई है। सारे वाहन चालक त्रस्त हैं। बेशक कांग्रेसी इस कारण चुप हैं कि सरकार उनकी है, मगर भाजपा से पूरी उम्मीद थी कि वह कुछ बोलेगी। अब जा कर बोली है। यूं उम्मीद कांग्रेस के नेता व बार अध्यक्ष राजेश टंडन से भी थी क्योंकि वे कांग्रेसी होते हुए भी गलत बात पर प्रशासन से भिड़ जाते हैं। मगर वे चुप हैं। और वह भी तब जब कि पांच दिन पहले जब पुलिस ने नाकाबंदी के नाम पर दादागिरी की और उनके वकील समुदाय के ही अशोक तेजवानी स्थानीय टीवी चैनलों पर पुलिस के खिलाफ दहाड़ रहे थे। चेहरे पर कपड़ा बांधने वाली लड़कियों के साथ जम कर बदसलूकी की गई, मगर कोई महिला संगठन नहीं बोला। यदि कानून के मुताबिक लड़कियों का कपड़ा बांधना गलत है तो आम दिनों में पुलिस क्यों चुप खड़ी रहती है। क्या इसके लिए पुलिस ने कभी समझाइश अभियान चलाया है?
खैर, हो सकता है कि यातायात पुलिस के पास अपने तर्क हों। वे दमदार भी हो सकते हैं। जैसे नाकाबंदी भले ही किसी और मकसद से की थी, मगर यदि जांच के दौरान वाहन चालक अप टू डेट नहीं होंगे तो चालान किए ही जाएंगे। बात ठीक भी है। मगर इसी यातायात पुलिस को जगह-जगह रुकने वाले सिटी बसें वाले नजर क्यों नहीं आतीं? सिटी बसों में भेड़ बकरियों की तरह ठूंसे हुए यात्री नजर क्यों नहीं आते? ओवर लोडेड वाहन नजर क्यों नहीं आते? नो एंट्री एरिया में घुसने वाले चौपहिया वाहन नजर क्यों नहीं आते? और अफसोस कि यह सब जयसिंह जैसे संजीदा और बुद्धिजीवी अधिकारी के होते हुए हो रहा है। संभव है पुलिस ये तर्क दे कि यातायात व्यवस्थित करना उसके जिम्मे है, वह बेहतर समझती है कि क्या करना है और क्या नहीं, इसमें किसी राजनीतिक दल अथवा बुद्धिजीवी को दखल नहीं देना चाहिए, मगर सामाजिक सरोकार भी तो कोई महत्व रखता है। आप कानून का पालन करवाइये। अजमेर की जनता वैसे भी कोई अडिय़ल नहीं है। मगर यदि पुलिस के प्रति असंतोष उभर रहा है तो पुलिस के आला अफसरों को इस पर विचार तो करना ही होगा कि निचले स्तर पर सिपाही या दीवान स्तर के कर्मचारी व्यवहार कैसा कर रहे हैं।
भाजपा की यह बात बिलकुल सही है कि कि शहर के प्रमुख चौराहों पर पैदल चलने वाले यात्रियों के लिये बनाई गयी जेबरा लाइनें सड़क के दोनों ओर बड़े जंगले व दीवारें होने के कारण तकनीकी रूप से उपयोग में आने योग्य नहीं हैं व गलत बनी हुई हैं, फिर भी यातायातकर्मी इसी ताक में रहते हैं कि कोई वाहन चालक इन गलत बनी जेबरा लाइनों पर आये तो उसका तत्काल चालान बना दिया जाये। भाजपा का यह आरोप भी बिलकुल सही है कि शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर लाखों रुपये खर्च कर यातायात की व्यवस्था व यातायात कर्मियों पर निगरानी के लिये शार्ट सर्किट कैमरे लगाये गये थे, लेकिन ये काम हीं नहीं करते। कहीं यह मिलीभगत का परिणाम तो नहीं है। कुल मिला कर पुलिस की कार्यवाही से बदमाशों में खौफ हो न हो, आम जनता में जरूर खौफ व्याप्त हो गया है। अगर यदि यह बात गलत है तो भाजपा क्यों कर इस मुद्दे पर पुलिस के आला अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया है। इस पर गौर किया ही जाना चाहिए।
भाजपा ने चेतावनी दी है कि यदि बेकसूरों के प्रति इस प्रकार की पुलिसिया कार्यवाही को रोका नहीं गया तो जनहित में आन्दोलन किया जाएगा, मगर देखने वाली बात ये होगी कि इससे आम जन को राहत मिल पाती है या नहीं।
-तेजवानी गिरधर

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