एक झटके में उड़ गया नसीम पर लगा आरोप

एक गुमनाम परचे के जरिए शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती नसीम अख्तर इंसाफ व उनके पति देहात कांग्रेस उपाध्यक्ष हाजी इंसाफ अली को बदनाम करने की साजिश एक झटके में ही नाकाम हो गई।
ज्ञातव्य है कि परचे में दोनों पर आरोप लगाया गया था कि किशनगढ़ के आसिफ हत्याकांड के आरोपियों को उन्होंने शरण दे रखी है, मगर मृतक आसिफ के पिता शकूर मोहम्मद व समाज के लोगों ने पहल कर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और खुद ही इस आरोप का पुरजोर शब्दों में खंडन कर दिया। जब मृतक के परिजन ही इस आरोप को बेबुनियाद बता रहे हैं तो उसके बाद शक की रत्ती मात्र भी गुंजाइश नहीं रह जाती है। हालांकि मंत्री की ओर से मुकदमा दर्ज होने की बजाय मृतक के पिता की ओर से आरोप का खंडन प्रायोजित लगता है, मगर यह कोई कम बात नहीं है कि मृतक के पिता को ही मंत्री व उनके पति पर शक नहीं है व उलटे आरोप का खंडन कर रहे हैं तो बात ही खत्म हो जाती है। इससे नसीम व इंसाफ खुद ब खुद पाक साफ साबित हो गए।
इतना ही नहीं देहात जिला कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और पंचशील विकास समिति के सदस्यों ने भी जिला कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देेकर नसीम अख्तर इन्साफ और हाजी इंसाफ अली के बारे में चिपकाए गए परचों को उन्हें बदनाम करने की साजिश करार देते हुए हरकत करने वालों को बेनकाब करने की मांग कर दी। नतीजतन खुद नसीम व इंसाफ को कुछ कहने की जरूरत ही नहीं पड़ी। मंत्री पर शक की सुई घुमाने की कोशिश उलटे यह हरकत करने वालों पर ही भारी पड़ गई और अब पुलिस उनको तलाशने की कोशिश में जुट गई है, अन्यथा विपक्ष को बैठे ठाले नसीम व उनके पति को घेरने का मौका मिल जाता।
ज्ञापन देने वालों ने कहा कि कुछ समाज कंटक शिक्षा राज्य मंत्री की लोकप्रियता को ठेस पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसकी आशंका अपुन ने पहले ही जाहिर कर दी थी कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कोई गुट विशेष इस प्रकार की हरकत कर रहा है। ज्ञातव्य है कि पूर्व में भी कचहरी मस्जिद पर भड़काऊ टिप्पणी वाले परचे की वजह से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का नसीम अख्तर के यहां रोजा इफ्तार का कार्यक्रम रद्द हो गया था। हालांकि तब भी पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया, मगर अब तक उसका खुलासा नहीं हो पाया है कि वह हरकत किसने की थी। ताजा मामले में मदनगंज थाना पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ धारा 153 में अफवाह फैलाकर आक्रोश, उत्तेजना फैलाने का मुकदमा दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है। पुलिस कम्प्यूटर, ऑफसेट, स्क्रीन प्रिंटिग की दुकानों पर पूछताछ कर रही है।
ज्ञातव्य है कि गत शनिवार सुबह से किशनगढ़ के विभिन्न स्थानों पर आसिफ हत्याकांड से जुड़े सात सवालों के परचे लगे पाए गए थे। परचे गांधीनगर, अजमेर रोड, सिटी रोड, जयपुर रोड पर सहित विभिन्न स्थानों पर लगे मिले थे। परचे में किसी संस्था या व्यक्ति का नाम नहीं लिखा गया। परचे में सात सवालों के जवाब जनता व सरकार से पूछे गए थे। पहला सवाल पूछा गया कि आखिर क्यों पांच महीने तक हत्यारे नहीं पकड़े गए? दूसरे सवाल में शिक्षा राज्यमंत्री नसीम अख्तर व इंसाफ अली पर आरोप लगाते हुए फरार चल रहे अन्य आरोपियों को क्यों शरण दे रखी है, का सवाल कर जवाब पूछा गया। तीसरे सवाल में मंत्री की ओर से पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए सवाल पूछा गया। चौथा सवाल ये था कि क्या अजमेर में मंत्री के सामने कानून बौना साबित हुआ? पांचवें सवाल में ऐेसे आपराधिक किस्म के लोगों पर सरकार चलाने का आरोप लगाते हुए जवाब पूछा। छठे सवाल में आखिर क्यों मंत्री व मंत्री पति एक बाप को मिलने वाले न्याय में बाधा बने हुए हैं, इसका जवाब मांगा। सातवें और आखिरी सवाल में पूछा गया सवाल था कि आखिर कब तक आसिफ के पिता को न्याय मिल पाएगा? इन सवालों से यह तो स्पष्ट है ही कि परचे लगाने वालों का मकसद नसीम अख्तर को बदनाम करना है, साथ ही संदेह होता है कि वे जांच की दिशा को भी मोडऩा चाहते हैं।
हालांकि आसिफ हत्याकांड में मंत्री को बदनाम करने की साजिश नाकाम हो गई है, मगर पुलिस के लिए यह चुनौती है कि वे षड्यंत्र करने वालों जल्द से जल्द पता लगाए।
-तेजवानी गिरधर

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