डटे हुए हैं डीएसओ गोयल, आखिर माजरा क्या है?

भारी विरोध और अनेक आरोपों के बाद भी अजमेर के जिला रसद अधिकारी हरिशंकर गोयल अपने पद पर डटे हुए हैं। यह आश्चर्यजनक इस कारण भी है कि कांग्रेस राज में कांग्रसियों के ही विरोध के बाद भी उनका बाल भी बांका नहीं हुआ है। अब तक तो उनकी शिकायत जिला कलेक्टर और मुख्यमंत्री से ही होती रही है, मगर अब तो खुले आम उनके मुंह पर ही उन्हें भ्रष्ट बताया जा रहा है। नए राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया के सिलसिले में नगर निगम सभागार में आयोजित बैठक में पार्षदों ने उन्हें खुले आम भ्रष्ट कहा गया और राशन वितरण प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार सहित कई अहम मुद्दों पर गोयल को आड़े हाथों लिया। एक पार्षद ने कहा कि विभाग द्वारा प्रत्येक राशन की दुकान से चार सौ रुपए प्रति माह की रिश्वत ली जाती है। पार्षद मोहनलाल शर्मा ने यह कहते हुए सनसनी फैला दी कि गोयल तो खुद भ्रष्ट हैं, यह राशि इनके पास भी तो जाती है। इस पर गोयल ने कहा कि यह आरोप झूठा है। किसी की सोच पर पाबंदी नहीं लगाई जा सकती है।
बहरहाल सवाल ये है कि इतने विवादास्पद बनाए जाने के बावजूद वे बेपरवाह बने हुए हैं, तो इसका मतलब ये है कि या तो वे वाकई ईमानदार हैं और बेईमान होने के आरोप राजनीति का हिस्सा हैं और या फिर उच्चाधिकारियों व रसद विभाग के मंत्री बाबूलाल नागर तक उनकी पकड़ इतनी मजबूत है कि कोई कितना भी भौंके, वे मस्त हाथी तरह ही चल रहे हैं। इसे यूं भी कहा जा सकता है कि जांको राखे साईयां, मार सके ना कोय।
ज्ञातव्य है कि गोयल की कार्यप्रणाली से सर्वप्रथम भाजपा विधायक श्रीमती अनिता भदेल ने नाराजगी दर्शायी थी। श्रीमती भदेल ने विधानसभा में यहां तक कह दिया था कि अजमेर में खाद्य मंत्री की नहीं बल्कि गोयल की चलती है। गोयल पर दूसरा प्रहार रसद विभाग की जिला स्तरीय सलाहकार समिति के सदस्य प्रमुख कांग्रेसी नेता महेश ओझा व शैलेन्द्र अग्रवाल ने किया था और आरोप लगाया कि गोयल समिति की उपेक्षा कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को शिकायत भेज कर उनके खिलाफ कार्यवाही करने व स्थानांतरण करने की मांग की है। गोयल की शिकायत राज्यसभा सदस्य प्रभा ठाकुर ने भी मुख्यमंत्री से कर रखी है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि राशन की दुकानों के आवंटन की प्रणाली में धांधली बाबत अनेक शिकायतें सामने आई हैं। राशन वितरण संबंधी अनियमितताओं के कारण अजमेर की जनता परेशान है। जिले में गैस एजेंसियों की मनमानी व रसाई गैस की सरेआम कालाबाजारी के कारण उपभोक्ताओं को समय पर रसोई गैस नहीं मिलने की शिकायतें लगातार आ रही हैं। अनुरोध है कि जिला रसद अधिकारी का तत्काल स्थानांतरण किया जाए और उन्हें जनहित संबंधी जिम्मेदारी नहीं दी जाए।
इन सभी शिकायतों का गोयल पर कोई असर नहीं पड़ा। यहां तक जिन राशन वालों से रिश्वत लेने का आरोप है, उन पर भी उनकी गहरी पकड़ है। तभी तो महेश ओझा व शैलेन्द्र अग्रवाल पर पलट वार करते हुए अजमेर डिस्ट्रिक्ट फेयर प्राइज शॉप कीपर्स एसोसिएशन ने आरोप जड़ दिया कि वे राशन वालों से अवैध वसूली करते हैं। उन्होंने बाकायदा मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिला कलेक्टर को भी दिया। हालांकि इसे साबित करना कत्तई नामुमकिन है कि गोयल के कहने पर ही राशन की दुकान वाले आगे आए, मगर ये सवाल तो उठ ही गया कि यदि राशन की दुकान वाले सलाहकार समिति के सदस्यों से पीडि़त थे तो वे गोयल पर हमले से पहले क्यों नहीं बोले? गोयल की शिकायत होने पर ही उन्हें सलाहकार समिति के सदस्यों की करतूत याद कैसे आई? जो कुछ भी हो, मगर इतना तय है कि गोयल ने अब तक किसी की भी परवाह किए बिना शुद्ध के लिए युद्ध सहित अवैध रसोई गैस की धरपकड़ के मामले में धूम मचा रखी है। भ्रष्ट व्यापारियों में उनका जबरदस्त खौफ है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि गोयल बेहद ईमानदार और कड़क अफसर हैं। दूसरी ओर चर्चा ये भी है कि उनकी ईमानदारी इस कारण स्थापित है क्योंकि कोई भी दुकानदार उनसे पंगा मोल नहीं लेना चाहता। वैसे भी व्यापारी ले दे कर मामला सुलटाने में विश्वास रखते हैं। कदाचित इसी कारण आज तक एक भी मामले में गोयल के भ्रष्टाचार को साबित नहीं किया जा सका है।

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