टूटते रिश्तों को बचाने के लिए सोफिया काॅलेज की सराहनीय पहल

नवीन वैष्णव
टूटते रिश्ते किस तरह बचाए जाए इस उद्देश्य को लेकर अजमेर के सोफिया काॅलेज में हिन्दी वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित करवाई गई। इसका विषय *‘‘स्वच्छंदताः रिश्ते टूटने का मूल कारण है’’* रखा गया। इसके पक्ष और विपक्ष में छात्राओं ने अपने विचार रखे।
सोफिया काॅलेज की हिन्दी विभागाध्यक्षा डाॅ सुनिला सियाल ने बताया कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में छोटी से छोटी बातों को लेकर रिश्ते टूट जाते हैं। इन टूटते रिश्तों को बचाने के उद्देश्य से वाद- विवाद प्रतियोगिता आयोजित हुई। जिसमें छात्राओं ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया और पक्ष व विपक्ष में अपने तर्क रखे।
*पक्ष में*
प्रतियोगिता में पक्ष में बोलने वाली छात्राओं ने कहा कि स्वच्छन्दता के कारण रिश्तों में कड़वाहट, तनाव, कुंठा, आदि को जन्म देती है। जो आगे चलकर रिश्ते के टूटने का कारण बनती है। महिलाएं आज आजादी पसंद हो गई है जो कि स्वच्छंदता का ही एक रूप है और वह अपने सास-ससुर के साथ रहना पसंद नहीं करती और वह अपने पति व बच्चों को लेकर अलग रहने चली जाती है। इससे बुढ़े मां-बाप की जिंदगी नरक के समान हो जाती है या फिर अलग नहीं जाती तो किसी वृद्धाश्रम में मां-बाप को धकेल दिया जाता है। बूढ़े मां-बाप उनकी स्वच्छंदता में भले ही खलल ना डालें लेकिन उन्हें यही लगता है और वह उनका बुढ़ापा बिगाड़ देते हैं। यही बात अगर पुरूषों की करें तो उनके किसी भी बात में अड़चन डालने पर वह उग्र हो जाएंगे और बात रिश्ते के टूटने तक पहुंच जाएगी।
*विपक्ष में*
प्रतियोगिता के विपक्ष में बोलते हुए छात्राओं ने कहा कि स्वच्छंदता को रिश्तों के टूटने का कारण मानना बिलकुल गलत है। इससे ओछी मानसिकता प्रदर्शित होती है। आज के समय में सबको खुलकर जीने का हक है और पति हो या पत्नी एक दुसरे पर विश्वास अवश्य करना चाहिए। रिश्ता विश्वास की डोर से बंधा होता है यदि यही नहीं रहा तो रिश्तों का कोई मतलब नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि रिश्ते टूटने का यह कारण नहीं होकर गैर जिम्मेदाराना व्यवहार, समय का अभाव, उचित मार्गदर्शन का अभाव सहित अन्य कारणों से रिश्ते टूटते हैं।
*कैसे बचाए जाएं रिश्ते*
रिश्ते बचाने के लिए चाहिए कि पति-पत्नी एक दुसरे को अच्छे से समझें। एक दुसरे के माता-पिता का सम्मान करें। कभी भी किसी बात को लेकर एक दुसरे परिवारों की तुलना नहीं करें। एक दुसरे के साथ नमृता से पेश आएं, आदर भाव रखें, स्वयं की गलतियों को स्वीकार करें, अह्म ना रखें तो रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी और स्वर्ग के समान जिंदगी भी हो जाएगी।
*यह रहे विजेता*
काॅलेज की हिन्दी विभागाध्यक्षा डाॅ सुनिता सियाल ने बताया कि प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर विजेता शेखावत, द्वितीय स्थान पर शिवालिका शर्मा व पलक शर्मा रहे जबकि तीसरे स्थान पर अनुप्रेक्षा जैन रही। सभी विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका पूनम पाण्डे, डाॅ अनिता सखलेचा और पर्सिस लतिकादास ने निभाई।
नवीन वैष्णव
(पत्रकार), अजमेर
9252958987
06-03-2018
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