क्या केन्द्र शासित शहर हो सकता है अजमेर ?

हो सकता है बहुत से लोगों ने इस बारे में पहले सोचा हो कि क्या अजमेर केन्द्र प्रशासित शहर हो सकता है? वर्तमान में संविधान में कहीं ऐसा किसी शहर के लिए प्रावधान है ? अजमेर देश के प्राचीन शहरों में से एक है। इसकी महत्ता और विशेषता का दूसरा कोई उदाहरण नहीं है। देश के संविधान में धर्मनिरपेक्ष शब्द है तो उसकी जन्म स्थली अजमेर है। सूफीज्म की बात की जाती है तो उसका उद्गम स्थल अजमेर है। बहुत गा़ैर करने की बात यह है कि अजमेर का दिल्ली से बड़ा गहरा और पुराना नाता रहा है। दिल्ली और अजमेर के बीच एक समानता प्राकृतिक भी है। यहाँ की जलवायु दिल्ली से बहुत मिलती है। दिल्ली और अजमेर के तापमान में बहुत कम फर्क है। गयारवीं शताब्दी तक सम्राट पृथ्वीराज चौहान का शासन अजमेर से दिल्ली तक रहा था। ब्रिटिश काल में अजमेर-मेरवाड़ा को मिलाकर नया एस्टेट बना जिसका स्टेट हेड अजमेर था। अजमेर का अलग स्टेट कमिशनर था जिसका संबंध सीधा दिल्ली से होता था। अजमेर में आनासागर किनारे खूबसूरत बारहदरी, ढाई दिन का झोपड़ा, सोनीजी का मंदिर, आज का सर्किट हाउस, मेयो कॉलेज, सेंट एन्सल्म्स चर्च सहित अनेक चर्च की अद्भुत बनावट का कोई सानी नहीं है। लेकिन आज अजमेर राजस्थान का एक सामान्य शहर बनकर रह गया है जहाँ ना रोजगार है ना औद्योगिक विकास है ना विकसित पर्यटन क्षेत्र है।

मुजफ्फर अली
जब भी किसी बड़े प्रोजेक्ट की बात होती है तो अजमेर के साथ राजनैतिक रुप से भेदभाव ही बरता गया है। देश की पहली स्मार्ट सिटी अजमेर को बनना था लेकिन राजनीति ने जयपुर, उदयपुर को बीच में ला दिया। स्वतंत्रता के बाद अजमेर शिक्षा की नगरी के रुप में विख्यात रही लेकिन अब कोटा को कहा जाता है। पर्यटन केन्द्र के रुप में उद्यपुर को विकसित कर दिया गया। शिक्षा प्राप्त कर युवाओं के लिए यहाँ अपना कैरियर बनाने का कोई अवसर नहीं है। इसकी जगह जयपुर ने ले ली।
बड़े विभाग मिले फिर भी पिछड़ा ही रहा
जानकारी के अनुसार वर्ष1955 में जब तत्कालीन अजमेर मेरवाड़ा एस्टेट को राजस्थान राज्य में मिलाने की प्रक्रिया चल रही थी। अजमेर को राजस्थान का हिस्सा बनाने के लिए तत्कालीन राव कमिशन ने रेल्वे मंडल, राजस्व, माध्यमिक शिक्षा, कर बोर्ड, लोकसेवा आयोग जैसे बड़ेे विभाग अजमेर को दिलवाए। अजमेर से सदियों बाद अस्तित्व में आया जयपुर को राजधानी बनाया गया क्यूँ कि वहाँ विस्तार की गुजांईश थी, बिजली पानी की किल्लत नहीं थी। समय गुजरता गया , चुनाव होते रहे, राजनेता अजमेर के विकास के लिए वादे करते रहे लेकिन जीतने के बाद सत्ता के मजे लूटते रहे अजमेर जैसा का तैसा रहा और राज्य के दूसरे शहरों से अजमेर पिछड़ता गया।
विकास के लिए करोड़ो रुपये अलग से मिले लेकिन ..-
अजमेर में सूफी संत हजऱत ख्वाजा मोईनुददीन चिश्ती की दरगाह और पुष्कर में ब्रहमा मंदिर की वजह से केन्द्र सरकार ने विकास के लिए अजमेर को अलग से करोड़ों रुपये आवंटित किए मगर उसका सीधा फायदा अजमेर को नहीं मिल सका है। राज्य सरकार बीच में रही। नब्बे के दशक में अजमेर के लिए 340 करोड़ की योजना बनी। नरसिंह राव सरकार ने करोड़ों रुपये दरगाह विकास के नाम पर अजमेर को दिए मगर खाना पूर्ती की गई।
अमेरिकी प्रशासन की नजर में आया-
वो तो भला हो सचिन पायलेट का जो 2009 में यहाँ के सांसद बने , केन्द्र में संचार मंत्री बने और उसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का भारत दौरा हुआ। देश दूरसंचार में कितना विकसित हो गया है यह दिखाने के लिए केन्द्रीय संचार मंत्री सचिन पायलेट ने राष्ट्र्रपति बराक ओबामा की विडियो कॉन्फे्रंस से अजमेर जिले के ककलाना गांव पंचायत से बात करवाई गई तो अमेरिकी प्रशासन की नजर में अजमेर की छवि विकासशील शहर की बन गई जिसका फायदा अजमेर को यह मिला कि 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब अमेरिका यात्रा पर गए और वहाँ भारत के सौ शहरों को स्मार्ट सिटी बनाए जाने की योजना बनीं तो सबसे पहला नाम अजमेर का आया।
हाथ मलता रहा अजमेर-
लेकिन फिर अजमेर के साथ भेदभाव बरता गया , राजनीति चली और अजमेर से पहले कई शहर स्मार्ट सिटी के लिए घोषित हो गए। अजमेर का नंबर दूसरी या तीसरी सूची में आया।
प्यासा ही रहा है शहर
केकड़ी के बीसलपुर गांव में बना बांध अजमेर की प्यास बुझाने के लिए ही निर्मित हुआ था। लेकिन अजमेर से ज्यादा पानी जयपुर को सप्लाई हो रहा है।
क्या हो सकता है ऐसा?
क्या ऐसा हो सकता है कि अजमेर को केन्द्र शासित शहर बनाए जाने के लिए अजमेर की जनता आवाज़ उठाए। इसका फायदा यह होगा कि केन्द्र की तरफ से अजमेर को आवांटित बजट सीधा अजमेर प्रशासन को मिलेगा, राज्य सरकार बीच में नहीं होगी। अजमेर के लिए अलग राज्यपाल होगा, अलग प्रभावशाली प्रशासन होगा जो सीधे दिल्ली से जुड़ा होगा जिससे अजमेर की आवाज सीधे केन्द्र सरकार सुनेगी। आज हम चंडीगढ़ को देख सकते हैं, पांडेचरी, लक्ष्यद्वीप को देख सकते हैं जो केन्द्र शासित है। अंतिम हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान की शासन व्यवस्था क्या फिर लौट सकती है?
– मुजफ्फर अली

Leave a Comment