क्या केकड़ी रघु शर्मा का अहसान मानेगा?

रघु शर्मा
चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने अपने विशेषाधिकारों का इस्तेमाल करते हुए केकड़ी के सरकारी अस्पताल को जिला स्तरीय चिकित्सालय का दर्जा दिलवा दिया। स्वाभाविक रूप से यह केकड़ी वासियों के लिए खुशी का मौका है। यह खुशी दिखाई भी दे रही है, मगर सवाल उठता है कि क्या केकड़ी रघु शर्मा का अहसान मानेगा?
असल में यह सवाल इसलिए जायज है क्यों कि इससे पहले भी जब वे यहां से विधायक व मुख्य सचेतक थे, तब उन्होंने केकड़ी को स्थाई रूप से अपनी कर्मस्थली बनाने के लिए जम कर विकास कार्य करवाए थे। केकड़ी को जिला बनाने की भी उन्होंने भरपूर कोशिश की। जनता भी मानती थी कि उन्होंने वाकई केकड़ी के लिए विशेष रुचि ली है। लेकिन जब चुनाव आए तो मीडिया भाजपा प्रत्याशी शत्रुघ्न गौतम की गोद में जा कर बैठ गया था। स्वाभाविक रूप से उसका असर जनता पर भी पड़ा और रघु शर्मा हार गए। अफसोस तो उनको खूब हुआ होगा, मगर उन्होंने जमीन नहीं छोड़ी। वक्त बदला और उन्होंने न केवल लोकसभा का उपचुनाव जीता, जिसमें केकड़ी का भी योगदान था, अपितु केकड़ी विधानसभा का चुनाव भी जीत कर दिखाया। अब मीडिया भी उनके गुणगान कर रहा है। मगर फिर भी यह आशंका तो है ही कि क्या रघु के इस अहसान को साढ़े चार साल बाद जनता याद रख पाएगी?
अहसान फरामोशी का एक और उदाहरण हमारी नजर में है। मौजूदा उप मुख्यमंत्री व तत्कालीन केन्द्रीय राज्य मंत्री सचिन पायलट ने अजमेर में जम कर काम करवाए, ताकि यहां उनका राजनीतिक केरियर स्थाई हो जाए, मगर जब चुनाव आए तो जनता ने मोदी के नशे में सारे काम भुला कर उन्हें हरवा दिया। हराने के बाद जरूर जनचर्चा थी कि अजमेर ने एक अच्छा व प्रभावशाली जनप्रतिनिधि खो दिया, मगर अब पछतावत होत क्या, जब चिडिय़ा चुग गई खेत। भूतपूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय शिवचरण माथुर ने भी भीलवाड़ा को चमन कर दिया, मगर अगले चुनाव में एनसीपी से मैदान में आए तो बुरी तरह से हरवा दिया। जोधपुर का मामला देखिए। विकास के जो नए आयाम वहां स्थापित हुए हैं, उसमें अशोक गहलोत की बड़ी भूमिका है, मगर जब उनके बेटे वैभव गहलोत ने चुनाव लड़ा तो मोदी की सुनामी में वहीं जनता सब कुछ भुला बैठी। ऐसी घटनाओं से यह सवाल उठता है कि आखिर जनता चाहती क्या है? अगर विकास पैमाना नहीं है तो जनप्रतिनिधि काहे को उस पर ध्यान दे? अगर जनता की हवा के साथ बहने की ही आदत है तो जनप्रतिनिधि विकास करवाने में क्यों रुचि लेगा?
यह सही है कि रघु शर्मा ने चिकित्सा मंत्री होने के नाते अपने क्षेत्र को जो लाभ पहुंचाया है, उससे अन्य क्षेत्र के लोगों को तकलीफ हो सकती है। यह तर्क दिया जा सकता है कि वे पक्षपात कर रहे हैं, लेकिन यह भी सोचना चाहिए कि कोई बड़ा जनप्रतिनिधि अगर अपने क्षेत्र के लिए कुछ खास नहीं कर पाता तो उसे उलाहना सुनना ही पड़ता है कि आपने हमारे लिए किया क्या?

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