क्या एलिवेटेड रोड पूरा होने तक जारी रहेगा विवाद?

जब से एलिवेटेड रोड बनाने की कवायद आरंभ हुई है, तब से यह विवाद में रहा है। एक बार तो स्थिति ये आ गई कि इसे बनाने के निर्णय को ही सिरे से नकार दिया गया था। जैसे तैसे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इसका काम शुरू हुआ तो इसके तकमीने को लेकर विवाद हो गया है।
आपको याद होगा कि पिछली कांग्रेस सरकार के समय नगर सुधार न्यास के तत्कालीन अध्यक्ष नरेन शहाणी भगत के कार्यकाल में इसका सर्वे हुआ था। वे अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए और नई सरकार आ गई तो प्रस्ताव व सर्वे ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। उसके बाद तत्कालीन शिक्षा राज्य मंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी ने सरकार पर दबाव बना कर इसके निर्माण की फाइल को आगे बढ़ाया, मगर तत्कालीन एडीए चेयरमैन शिवशंकर हेड़ा ने तकनीकी पहलु उठाते हुए इसे अव्यावहारिक बताया और फंड को लेकर भी हाथ खड़े कर दिए। खींचतान होती रही। आखिर देवनानी की चली और इसे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के पैसे से बनाने का निर्णय हुआ। पिछली भाजपा सरकार में चुनाव से पहले आनन-फानन में इसका सिंबोलिक शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से करवा लिया गया। काफी दिन तक काम शुरू नहीं हुआ। आखिर जब स्मार्ट सिटी के फंड से पैसा आया तो निर्माण आरंभ हो पाया है। छोटी-मोदी अड़चनें आती रहीं, इस कारण काम की गति बहुत धीमी रही। जब काम ने रफ्तार पकड़ी तो जाने-माने एडवोकेट राजेश टंडन ने यह रहस्योद्धान किया कि गुपचुप तरीके से आगरा गेट से लेकर महावीर सर्किल की भुजा रद्द की जा रही है। उनका साथ कांग्रेस ने भी दिया। आखिरकार जिला कलेक्टर को हस्तक्षेप करना पड़ा और यह साफ हो गया कि टेंडर के अनुसार ही इसका सिरा महावीर सर्किल से आरंभ होगा। इस पर काम शुरू होने ही जा रहा है कि नगर सुधार न्यास के पूर्व अध्यक्ष धर्मेश जैन ने रुकावट डालने की कोशिश कर दी है। उन्होंने बाकायदा सरकार को पत्र लिख कर प्रेस नोट जारी कर दिया है कि एलिवेटेड रोड की भुजा महावीर सर्किल के बजाय आगरागेट से चढ़ाई जाए।
जैन का कहना है कि एलिवेटेड रोड की इस भुजा का हाल जयपुर की खासा कोठी वाली सड़क की तरह होने की आश्ंाका है। अगर आगरा गेट चैराहे से तरफ भुजा चढ़ती है तो उसका सभी को लाभ मिलेगा। नला बाजार, नया बाजार, धानमंडी, अग्रसेन सर्किल, हाथी भाटा, आदि शहर के भीतरी क्षेत्र से किसी को रामगंज, ब्यावर रोड, मार्टिण्डल ब्रिज की तरफ जाना हो तो उन्हें अनावश्यक महावीर सर्किल घूम कर जाना नहीं पड़ेगा। उनके लिए आगरा गेट से ही अपने गंतव्य के लिए सहज मार्ग उपलब्ध हो सकेगा।
धर्मेश जैन ने सर्वे को ही गलत करार दे दिया है। उनका कहना है कि महावीर सर्किल पर ऐतिहासिक नसियांजी के अतिरिक्त जैन समाज, अग्रवाल समाज के छोटे-बड़े धड़ों की नसियां, जनकपुरी समारोह स्थल आदि स्थित हैं, जहां बारह मास सामाजिक एवं धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। इसके अतिरिक्त महावीर सर्किल पर एक रास्ता दरगाह और तीर्थराज पुष्कर की ओर भी जाता है, वहीं पर आनासागर झील व सुभाष उद्यान में जाने के प्रवेश द्वार भी हंै। सूफी संत ख्वाजा गरीब नवाज की महाना छठी, उर्स, मोहर्रम आदि को लेकर जहां वर्ष पर्यन्त पैदल जायरीन एवं यात्रियों की भीड़ उमड़ी रहती है। यहां भारी यातायात दवाब बना रहता है। ऐसे में एलिवेटेड रोड की वहां भुजा चढ़ाए जाने से यातायात दवाब और बढ़ जाएगा जो कि आगे चल कर शहरवासियों के लिए एक और नई मुसीबत खड़ी करेगा।
जैन के तर्क में वाकई दम है, मगर सवाल ये उठता है कि आज जब महावीर सर्किल से काम शुरू होने ही जा रहा है, तब जा कर वे आपत्ति क्यों दर्ज करवा रहे हैं? उनका कहना है कि काम अभी शुरू नहीं हुआ है और पुनर्विचार करने की गुंजाइश है। अगर आज उनके प्रस्ताव पर ध्यान नहीं दिया गया तो आगे चल कर शहर वासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। बेहतर ये है कि अब भी उनके प्रस्ताव पर गौर किया जाए। अब देखते हैं कि ये नया विवाद क्या रूप लेता है?
-तेजवानी गिरधर
7742067000

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